आरक्षण पर बयान को लेकर शंकरसिंह वाघेला ने माफी से किया इनकार, बोले- सवाल ही नहीं उठता

HIGHLIGHTS
- वाघेला ने रविवार को वीडियो संदेश जारी कर अपना पक्ष रखा।
- उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में कभी बयान वापस नहीं लिए।
- विवाद शुक्रवार को नर्मदा जिले के सागबारा में दिए बयान से शुरू हुआ।
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने आरक्षण को लेकर दिए अपने विवादित बयान पर माफी मांगने से इनकार कर दिया है। रविवार को जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने जो भी कहा है, पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा है। वाघेला ने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी अपने बयान वापस नहीं लिए और उनके माफी मांगने का कोई सवाल नहीं है।
वाघेला के मुताबिक, उनकी टिप्पणी भाजपा की केंद्र और गुजरात सरकार के आरक्षण विरोधी रुख को लेकर थी, किसी विशेष जाति के खिलाफ नहीं।
किस बयान को लेकर हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत शुक्रवार को गुजरात के नर्मदा जिले के सागबारा में एक कार्यक्रम के दौरान वाघेला के बयान से हुई। गांधी जयंती के अवसर पर आदिवासी किसानों की सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि यदि पटेल, वणिक या ब्राह्मण समुदाय के लोग हाथ से मैला उठाने का काम करने के लिए तैयार हों, तो वह उन्हें हर महीने 50 हजार रुपये देने के लिए तैयार हैं।
वाघेला ने इस बयान के जरिए ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों के लिए आरक्षण की जरूरत समझाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि आरक्षण किसी पर किया गया एहसान नहीं है, बल्कि लंबे समय तक झेले गए भेदभाव और पीड़ा के बदले मिला अधिकार है।
दलित समुदाय को लेकर क्या बोले वाघेला?
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय दलित समुदाय के लोगों को मंदिरों में प्रवेश नहीं दिया जाता था। उन्हें पीने के पानी की सुविधा से भी वंचित रखा जाता था और गांव में बारात निकालने की अनुमति तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय के लोगों को मानव मल ढोने का काम करना पड़ता था।
वाघेला के अनुसार, आरक्षण देने के पीछे इन समुदायों के साथ लंबे समय तक हुए भेदभाव की भरपाई करने का विचार था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में थी।
ब्राह्मण और पटेल समुदाय के विरोधी होने से इनकार
वाघेला ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह ब्राह्मण या किसी अन्य सवर्ण समुदाय के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर वह ब्राह्मण विरोधी हैं, तो उनके मुख्यमंत्री रहते भगवान परशुराम जयंती पर छुट्टी देने की अनुमति किसने दी थी।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या कोई ऐसा उदाहरण दे सकता है, जब उन्होंने पटेल समुदाय का विरोध किया हो। वाघेला ने कहा कि उनके बयान को किसी जाति के खिलाफ बताना गलत है। उन्होंने कहा कि वह दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के आरक्षण के अधिकारों की बात कर रहे थे।
भाजपा पर साधा निशाना
वाघेला ने इस विवाद के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आरक्षण का विरोध करने वाले भाजपा के लोग हैं और उनकी टिप्पणी का निशाना भी वही पार्टी थी।
उन्होंने बताया कि करीब एक साल पहले भी उन्होंने आरक्षण को लेकर इसी तरह की बात कही थी, लेकिन उस समय किसी ने आपत्ति नहीं जताई थी। वहीं, गुजरात भाजपा के पूर्व मीडिया संयोजक और समस्त ब्रह्म समाज के संयोजक यज्ञेश दवे ने शनिवार को वाघेला के बयान पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि समुदायों और जातियों के बीच दुश्मनी पैदा करना उचित नहीं है।
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