दिल्ली-UP समेत इन राज्यों में फिर होगी बारिश, 6 से 12 अक्टूबर तक बदलेगा मौसम

HIGHLIGHTS
- मौसम में बदलाव सोमवार से दिखाई देने की संभावना है।
- उत्तर प्रदेश और राजस्थान से मानसून पूरी तरह विदा हो चुका है।
- बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट गया है।
नई दिल्ली। मानसून की वापसी के बावजूद उत्तर भारत में बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में छह अक्टूबर से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश होने के आसार हैं। छह से 12 अक्टूबर के बीच दो पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित कर सकते हैं।
स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार, मौसम में बदलाव सोमवार से नजर आने लगेगा। उत्तर प्रदेश और राजस्थान से मानसून पूरी तरह विदा हो चुका है। वहीं बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी मानसून की वापसी हो गई है।
इस बीच उत्तर-पश्चिमी हवाओं की दिशा में बदलाव शुरू हो गया है। सोमवार को चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। इसके बाद छह अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव बढ़ सकता है। इसके चलते जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।
मंगलवार से सक्रिय होगा पहला पश्चिमी विक्षोभ
पहला पश्चिमी विक्षोभ मंगलवार के आसपास प्रभावी हो सकता है, जबकि दूसरा पश्चिमी विक्षोभ 10 से 12 अक्टूबर के बीच मजबूत होने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में नौ और 10 अक्टूबर को बारिश के आसार हैं। पंजाब में सात अक्टूबर से रुक-रुककर बारिश हो सकती है। वहीं हरियाणा और दिल्ली में हल्की बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं।
10 अक्टूबर के बाद पश्चिमी विक्षोभ का असर राजस्थान तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, मैदानी इलाकों में बारिश की तीव्रता ज्यादा रहने के आसार नहीं हैं।
मौसम में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर भारत में बारिश का आधार अब बदल रहा है। जून से सितंबर तक बारिश मुख्य रूप से मानसूनी परिसंचरण और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी पर निर्भर रहती है। हाल के दिनों में मानसून की वापसी के साथ यह व्यवस्था कमजोर हो रही है और पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका बढ़ रही है।
आईएमडी के अनुसार, मानसून की वापसी का निर्धारण केवल बारिश कम होने के आधार पर नहीं किया जाता। इसके लिए नमी में कमी और निचले वायुमंडल में साइक्लोनिक सर्कुलेशन जैसे संकेतों को भी देखा जाता है। मौसम में इस बदलाव का असर खेती पर भी पड़ेगा। खरीफ फसलों की कटाई शुरू हो चुकी है और कई इलाकों में किसान रबी की तैयारी में जुटने वाले हैं।
किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
अक्टूबर में होने वाली बारिश कटाई के दौरान किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां फसल खेतों में पड़ी है। वहीं, पर्याप्त बारिश से खेतों में नमी बढ़ने पर गेहूं, सरसों और चने जैसी रबी फसलों की शुरुआती बुआई के लिए परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं।
अक्टूबर की शुरुआत में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का अलग असर देखने को मिल सकता है। उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ बारिश ला सकता है। वहीं, मानसून की वापसी के बाद पश्चिमी हवाओं का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ने से दिन के तापमान में गिरावट और रात में ठंडक की शुरुआत का रास्ता भी साफ हो सकता है।
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