ओमान में मिसाइल हमले में मारे गए सूरज यादव का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पिता ने दी मुखाग्नि

HIGHLIGHTS
- अगस्त में रोजगार के सिलसिले में ओमान गए थे
- रविवार को विशेष विमान से पार्थिव शरीर भारत पहुंचा
- गोरखपुर एयरपोर्ट से शव परिजनों को सौंपा गया
देवरिया। ओमान में एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले उत्तर प्रदेश के देवरिया स्थित गौरी बाजार क्षेत्र के कर्माजीतपुर गांव निवासी सूरज यादव का पार्थिव शरीर रविवार शाम उनके पैतृक गांव पहुंचा। सूरज की अचानक हुई दर्दनाक मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर है। शव पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया और वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
अगस्त में ओमान गए थे सूरज
कर्माजीतपुर गांव निवासी ओमप्रकाश यादव के पुत्र सूरज यादव मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। रोजगार के सिलसिले में वह बीते अगस्त महीने में ही ओमान गए थे। परिजनों को उम्मीद थी कि वह जल्द ही सकुशल घर लौटेंगे, लेकिन बुधवार देर रात आई मनहूस खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
परिजनों के अनुसार, सूरज जिस वाणिज्यिक जहाज पर तैनात थे, वह ओमान से भारत की ओर आ रहा था। इसी दौरान रास्ते में जहाज पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें सूरज की जान चली गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। इसके बाद रिश्तेदारों और ग्रामीणों का परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
दिल्ली और गोरखपुर एयरपोर्ट से होते हुए गांव पहुंचा पार्थिव शरीर
लंबे इंतजार के बाद रविवार को ओमान से सूरज का पार्थिव शरीर विशेष विमान से दिल्ली पहुंचा। इसके बाद वहां से अपराह्न 3:20 बजे गोरखपुर एयरपोर्ट लाया गया। एयरपोर्ट पर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शाम 4 बजे शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस से पार्थिव शरीर को कर्माजीतपुर गांव लाया गया।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा पूरा जवार
गांव के लाल के अंतिम दर्शन के लिए सूरज के घर के बाहर पहले से ही सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी थी। एंबुलेंस से ताबूत उतारकर जैसे ही दरवाजे पर रखा गया, लोग अंतिम झलक पाने के लिए उमड़ पड़े।
ताबूत खुलते ही मां पुष्पा देवी बेटे के शव से लिपटकर बेसुध हो गईं। वहीं, पिता ओमप्रकाश यादव सदमे में जमीन पर गिर पड़े। दूसरी ओर, भीड़ से अलग सूरज के बाबा रामा यादव अपने छोटे पोते सन्नी से लिपटकर फूट-फूटकर रोते नजर आए। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
इसके बाद कर्माजीतपुर से भटौली बुजुर्ग होते हुए शव यात्रा खरोह चौराहा और गोरखपुर मुख्य मार्ग से गुजरी। मझना नाला के पास देर शाम भारी भीड़ और नम आंखों के बीच सूरज का अंतिम संस्कार किया गया।
पिता ओमप्रकाश यादव ने भारी और टूटे कदमों के साथ अपने जिगर के टुकड़े को मुखाग्नि दी। इस दौरान सैकड़ों युवाओं ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाकर अपने लाडले को अंतिम विदाई दी।
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