कांवड़ यात्रा 2026: शिविरों में भोजन की गुणवत्ता पर सख्ती, खाद्य विभाग ने जारी की 22 बिंदुओं की गाइडलाइन

HIGHLIGHTS
- कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने शिविर संचालकों के लिए 22 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की।
- रसोइयों के लिए ग्लव्स, हेड कवर, साफ कपड़े पहनना अनिवार्य किया गया है, वहीं गुटखा-तंबाकू सेवन और अस्वच्छ तरीकों पर रोक लगाई गई है।
- मेरठ में शिविरों की जांच के लिए 10 टीमें गठित की गई हैं, नियमों का उल्लंघन मिलने पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने शिविर संचालकों के लिए 22 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की है।
विभाग ने निर्देश दिए हैं कि भोजन तैयार करने से लेकर उसे परोसने तक स्वच्छता के सभी नियमों का पालन करना जरूरी होगा। रसोई में काम करने वाले कर्मचारियों को ग्लव्स, हेड कवर और साफ कपड़ों का इस्तेमाल करना होगा। खाने में ज्यादा रंगों का प्रयोग नहीं किया जाए, रसोइयों के बाल लंबे नहीं होने चाहिए और उन्हें गुटखा आदि का सेवन नहीं करना होगा।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने बताया कि नियमों की अनदेखी मिलने पर संबंधित शिविर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य कांवड़ मार्ग पर लगने वाले भंडारों और शिविरों में स्वच्छ, सुरक्षित और मानक के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि भोजन तैयार करने वाले स्थानों की नियमित सफाई जरूरी होगी। रसोइयों के बाल छोटे या पूरी तरह ढके होने चाहिए। इसके लिए हेड कैप, ग्लव्स और साफ एप्रन का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
स्टील के चाकू का ही करना होगा इस्तेमाल
विभाग ने निर्देश दिए हैं कि भोजन बनाने में लोहे के चाकू का प्रयोग नहीं किया जाए, बल्कि स्टील के चाकू ही इस्तेमाल किए जाएं। खाना बनाने या परोसने के दौरान गुटखा, तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। खुली खाद्य सामग्री खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल को लेकर विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि पैकेटबंद खाद्य सामग्री का उपयोग किया जाता है तो उसकी एक्सपायरी डेट, पैकेट की स्थिति और गुणवत्ता जांचने के बाद ही उसे खरीदा जाए। किसी भी स्थिति में बासी या खराब खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
शिविर लगाने के लिए ऐसे स्थान का चयन करने को कहा गया है, जहां आसपास निर्माण कार्य, धूल-मिट्टी या गंदगी न हो। भोजन को ढककर रखने, कूड़ेदान की व्यवस्था करने और गीले-सूखे कचरे का नियमित निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मक्खी, मच्छर और अन्य कीटों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम करने होंगे।
10 टीमें रोज करेंगी शिविरों की जांच
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी रवि शर्मा ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान शिविरों का लगातार निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए 10 टीमों का गठन किया गया है। गाइडलाइन का उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
जारी गाइडलाइन के प्रमुख निर्देश
- पीने के लिए आरओ या सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करनी होगी।
- भोजन को हमेशा ढककर रखना होगा और धूल-मिट्टी से बचाना होगा।
- रसोई में पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।
- कच्चे और पके भोजन को अलग-अलग रखना होगा।
- दूध, दही और पनीर जैसी खाद्य सामग्री को उचित तापमान पर सुरक्षित रखना होगा।
- शिविर में प्राथमिक उपचार किट उपलब्ध होनी चाहिए।
- आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र या अन्य साधन रखना जरूरी होगा।
- हाथ धोने के लिए साबुन और साफ पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
- इस्तेमाल किए गए तेल का बार-बार प्रयोग नहीं किया जाएगा।
- प्लास्टिक या प्रतिबंधित सामग्री की जगह फूड-ग्रेड बर्तनों का इस्तेमाल करना होगा।
- शिविर परिसर में शौचालय और कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
- भोजन बनाने वाले कर्मचारियों का स्वास्थ्य ठीक होना चाहिए और बीमार व्यक्ति को रसोई कार्य से दूर रखना होगा।
- खाद्य सामग्री की खरीद के बिल और पैकेट सुरक्षित रखने होंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर जांच की जा सके।
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