कर्नाटक सरकार का आदेश, राजकीय कार्यक्रमों में गाए जाएंगे ‘वंदे मातरम’ के दो पद

HIGHLIGHTS
- राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई
- राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में भी सभी छह पद गाए जाएंगे
- केंद्र सरकार के प्रतिनिधित्व वाले कार्यक्रमों में पूरा गीत गाया जाएगा
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने राज्य में होने वाले सभी सरकारी कार्यक्रमों और आधिकारिक समारोहों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, राज्य सरकार के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राजकीय कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल दो पद ही गाए जाएंगे।
वहीं, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और केंद्र सरकार के प्रतिनिधित्व वाले कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह पद गाए जाएंगे।
केंद्र सरकार के निर्देश के बाद फैसला
कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार का यह आदेश केंद्र सरकार के उस निर्देश के बीच आया है, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के सभी छह पदों का गायन अनिवार्य किया गया है। आदेश में कहा गया है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने राष्ट्रवाद, एकता और देशभक्ति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पिछले महीने कांग्रेस कार्य समिति ने 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया था। इसके तहत पार्टी के कार्यक्रमों में केवल पहले दो श्लोक गाए जाएंगे।
8 सितंबर, 2026 को जारी सरकारी आदेश के मुताबिक, यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर लिया गया है। यह आदेश कर्नाटक के राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है।
आदेश में क्या कहा गया?
कन्नड़ में जारी आदेश के अनुवाद में कहा गया है, "भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के आधिकारिक संस्करण और विभिन्न सरकारी एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके गायन या वादन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका अवसरानुसार पालन किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने राज्य में आयोजित होने वाले विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों के स्वरूप एवं अवसर के अनुसार राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के वादन/गायन में एकरूपता, सम्मान और उचित शिष्टाचार (प्रोटोकॉल) बनाए रखना आवश्यक समझा है।"
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