डीजीसीए का बड़ा फैसला, सभी एयरलाइंस के पायलटों का ड्रग टेस्ट अनिवार्य

HIGHLIGHTS
- डीजीसीए ने अगस्त 2026 में एयरलाइंस को निर्देश दिए थे
- सभी पायलटों की जांच जुलाई 2027 तक पूरी करनी होगी
- मौजूदा नियमों में सालाना 10 फीसदी पायलटों की रैंडम जांच होती है
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी एयरलाइंस के पायलटों के लिए ड्रग परीक्षण अनिवार्य कर दिया है। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस अभियान को जुलाई 2027 तक पूरा करना होगा। हाल ही में हुई एक गंभीर विमानन घटना के बाद यह कदम उठाया गया है। नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने भी कहा है कि नए मानदंडों को इस महीने के अंत तक अंतिम रूप दिया जाएगा।
डीजीसीए ने अगस्त 2026 में सभी एयरलाइंस को पायलटों के ड्रग परीक्षण का आदेश दिया था। एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके सभी पायलटों की जांच जुलाई 2027 तक पूरी हो जाए। यह फैसला एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के पायलट-इन-कमांड के ड्रग परीक्षण में पॉजिटिव पाए जाने के बाद लिया गया है।
4 अगस्त 2026 को हुई इस घटना के दौरान विमान ने अचानक लगभग 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। हादसे में कई यात्री घायल हुए थे और विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में पायलट द्वारा ड्रग के इस्तेमाल को गंभीर चिंता बताया गया था। रिपोर्ट में डीजीसीए से उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद 4 सितंबर 2026 को एयर इंडिया ने संबंधित पायलट की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी थीं।
मौजूदा नियम क्या हैं और बदलाव क्यों किया गया?
फिलहाल पायलटों के ड्रग परीक्षण यादृच्छिक तरीके से किए जाते हैं। डीजीसीए के मौजूदा सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) के तहत हर साल 10 फीसदी पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर समेत अन्य कर्मचारियों का साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए रैंडम टेस्ट किया जाता है।
देश की अलग-अलग वाणिज्यिक एयरलाइंस में 12,000 से अधिक पायलट काम कर रहे हैं। फुकेत उड़ान की घटना और पायलट के ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद एयर इंडिया समूह ने अगस्त 2026 में ही अपने सभी पायलटों का ड्रग परीक्षण कराने का फैसला किया था। इस घटना के बाद मौजूदा परीक्षण व्यवस्था की पर्याप्तता पर भी सवाल उठे थे।
फुकेत उड़ान में क्या हुआ था?
एएआईबी ने 4 सितंबर 2026 को फुकेत उड़ान घटना की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें घटना का विस्तृत विवरण दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 145 लोगों को लेकर उड़ रहा विमान 36,000 फीट की ऊंचाई पर था, तभी उसके तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम लगभग एक साथ फेल हो गए।
इससे ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया और कुछ समय के लिए स्टॉल चेतावनी मिली। इसके साथ ही विमान की ऊंचाई में भी गड़बड़ी हुई। इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उड़ान के बाद किए गए पुष्टिकरण परीक्षण में पायलट-इन-कमांड साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए गैर-नकारात्मक पाया गया था।
आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?
एएआईबी ने विमानन नियामक डीजीसीए को साइकोएक्टिव पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। ब्यूरो ने कहा था कि साइकोएक्टिव पदार्थ के इस्तेमाल की पुष्टि गंभीर चिंता का विषय है और डीजीसीए को प्राथमिकता के आधार पर उचित कदम उठाने चाहिए।
नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने गुरुवार (10 सितंबर 2026) को राष्ट्रीय राजधानी में एक सम्मेलन के दौरान बताया कि पायलटों के साइकोएक्टिव पदार्थों के परीक्षण से जुड़े संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) के मसौदे को इस महीने के अंत तक अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया हितधारकों के साथ चर्चा के बाद पूरी की जाएगी।
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