शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 780 अंक टूटा; आईटी शेयरों में भारी बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को कमजोर शुरुआत की। पिछले पांच कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर ब्रेक लगाते हुए सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आए। बाजार में सबसे ज्यादा असर आईटी सेक्टर की भारी बिकवाली का देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 787 अंक फिसलकर 76,625 के आसपास पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 210 अंक से अधिक टूटकर 23,960 के स्तर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। निवेशकों के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों और आईटी कंपनियों को लेकर बढ़ी चिंताओं का असर साफ नजर आया।
आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट
बाजार पर सबसे अधिक दबाव सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों की बिकवाली से बना। वैश्विक आईटी सेवा कंपनी एक्सेंचर द्वारा राजस्व वृद्धि अनुमान घटाने के बाद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।
इसी का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दिखाई दिया। इंफोसिस के शेयरों में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक भी तेज दबाव में रहे। आईटी इंडेक्स में 5 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज हुई, जिससे पूरे बाजार का रुख नकारात्मक हो गया।
हालांकि कुछ शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की। एनटीपीसी, भारती एयरटेल, ट्रेंट और पावर ग्रिड जैसी कंपनियां बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहीं।
रुपये में मजबूती, निवेशकों के लिए राहत
जहां इक्विटी बाजार में गिरावट देखने को मिली, वहीं विदेशी मुद्रा बाजार से सकारात्मक संकेत मिले। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 10 पैसे मजबूत होकर 94.30 के स्तर तक पहुंच गया।
विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत रुपया और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
क्या जल्द लौट सकती है तेजी?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट का मुख्य कारण आईटी सेक्टर में अचानक बढ़ा दबाव है। हालांकि लंबी अवधि के नजरिए से भारतीय बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम हो सकता है। इसके अलावा तेल कीमतों में नरमी और स्थिर मुद्रा बाजार निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, एक्सेंचर के कमजोर आउटलुक का असर भारतीय आईटी कंपनियों के विदेशी निवेशकों पर भी पड़ा है, जिससे इस सेक्टर में दबाव बढ़ा।
वैश्विक बाजारों से भी नहीं मिला सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख भी मिलाजुला रहा। अमेरिका के एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और जापान के टॉपिक्स इंडेक्स में गिरावट देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई और यूरोपीय फ्यूचर्स बाजार भी दबाव में रहे।
वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और यह 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। एशिया के कुछ बाजारों में सीमित बढ़त जरूर रही, लेकिन कुल मिलाकर वैश्विक माहौल सतर्कता वाला बना हुआ है।
विदेशी निवेशकों ने जारी रखी बिकवाली
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले कारोबारी सत्र में 1,025 करोड़ रुपये से अधिक के शेयरों की बिकवाली की। हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को कुछ हद तक संतुलित बनाए रखा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को केवल एक सेक्टोरल दबाव के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और आईटी शेयरों में बिकवाली थमती है, तो भारतीय बाजार फिर से रिकवरी की राह पकड़ सकता है।
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