मुजफ्फरनगर पंचायत केस: संजीव बालियान, सुरेश राणा समेत 25 आरोपियों से मुकदमा वापस

HIGHLIGHTS
- 31 जुलाई 2013 को नंगला मंदौड़ इंटर कॉलेज में हुई थी पंचायत
- सरकारी कार्य में बाधा और निषेधाज्ञा उल्लंघन के आरोप में दर्ज हुआ था मामला
- मामले में कई पूर्व मंत्री, सांसद और विधायक आरोपी बनाए गए थे
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान नंगला मंदौड़ पंचायत में सरकारी कार्य में बाधा डालने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन से जुड़े मामले में कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, सपा सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा समेत 25 आरोपियों के खिलाफ केस शासन के आदेश पर वापस ले लिया गया है। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने इस संबंध में आदेश जारी किए।
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, पूर्व विधायक उमेश मलिक, मोघपुर निवासी कल्लू और योगेश, नंगला कबीर निवासी सचिन, अंतवाड़ा निवासी रविंद्र और तेजपुरा निवासी मिंटू के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। वहीं, दूसरे आरोपपत्र में श्यामपाल चेयरमैन, साध्वी प्राची और बिट्टू सिखेड़ा को आरोपी बनाया गया था। जीवना निवासी शिव कुमार की पत्रावली अलग कर दी गई थी, जबकि पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र कुतुबपुर की मौत हो चुकी है।
31 जुलाई 2013 को हुई थी पंचायत
नंगला मंदौड़ इंटर कॉलेज के मैदान में 31 जुलाई 2013 को पंचायत आयोजित हुई थी। इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने, रास्ता रोकने और 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धारा के तहत तत्कालीन सिखेड़ा एसओ चरण सिंह यादव ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
तत्कालीन एडीएम प्रशासन की ओर से निषेधाज्ञा उल्लंघन के मामले में वर्तमान सपा सांसद हरेंद्र मलिक, कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल, पूर्व विधायक उमेश मलिक, एमएलसी अशोक कटारिया और नृसिंहानंद उर्फ दीपक त्यागी समेत 21 आरोपियों के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया गया था। इनमें से 16 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
शासन के आदेश के बाद केस वापसी
बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्यामवीर सिंह, बिजेंद्र सिंह मलिक, विनोद गुप्ता और आयुष बालियान ने बताया कि शासन की ओर से केस वापसी के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके थे। उत्तर प्रदेश शासन न्याय अनुभाग-5 (फौजदारी) के विशेष सचिव के पत्र का हवाला देते हुए प्रशासन की ओर से डीजीसी को पत्र भेजा गया था।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.