मुजफ्फरनगर: कंपनी बाग जाने वाला रास्ता बंद होने पर सड़क पर उतरे लोग, प्रशासन से मार्ग खोलने की मांग

HIGHLIGHTS
- सुमन विहार से कंपनी बाग जाने वाला रास्ता बंद होने के विरोध में स्थानीय लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
- लोगों का आरोप है कि सरकारी मार्ग पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण किए जाने से वर्षों पुराना सार्वजनिक रास्ता बंद हो गया है।
- प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से जल्द अतिक्रमण हटाकर रास्ता खोलने की मांग की, साथ ही कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
मुजफ्फरनगर: शहर के सुमन विहार सर्कुलर रोड से कमला नेहरू वाटिका (कंपनी बाग) तक जाने वाला रास्ता बंद किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में कॉलोनी के निवासी, बुजुर्ग और महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुछ लोगों ने सरकारी रास्ते पर कब्जा कर वहां पक्का निर्माण कर दिया है, जिसके कारण वर्षों से इस्तेमाल हो रहा सार्वजनिक मार्ग बंद हो गया। लोगों का कहना है कि पहले इस रास्ते पर गेट लगा था, जिससे आसपास की कॉलोनियों के लोग आसानी से कंपनी बाग तक पहुंच जाते थे।

रास्ता बंद होने से बढ़ी लोगों की परेशानी
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, मार्ग बंद होने के बाद उन्हें कंपनी बाग पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है, जो नियमित रूप से सुबह-शाम टहलने और व्यायाम के लिए कंपनी बाग जाते हैं।
लोगों का कहना है कि वैकल्पिक रास्ते खराब स्थिति में हैं। सड़क की खराब हालत और आवारा कुत्तों के कारण दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
अवैध कब्जे का लगाया आरोप
शिकायतकर्ता सभ्यता चौधरी ने आरोप लगाया कि भगत जी स्वीट्स के सामने स्थित सार्वजनिक रास्ते को पहले गेट हटाकर और बाद में पक्का निर्माण कर बंद किया गया। उन्होंने कहा कि कॉलोनी में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक रहते हैं, जिनके लिए यह रास्ता बेहद सुविधाजनक था।
एक अन्य महिला प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि सरकारी सड़क पर अवैध कब्जे के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि वैकल्पिक मार्गों की स्थिति खराब होने से कई लोगों को चोट भी लग चुकी है।
प्रशासन पर कार्रवाई में देरी का आरोप
स्थानीय निवासी नवीन कुमार ने बताया कि पहले कुछ लोगों के दबाव में रास्ता बंद करने को लेकर सहमति ली गई थी, लेकिन अब लोगों की जरूरतों को देखते हुए मार्ग दोबारा खोलने की मांग की जा रही है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अभी तक अतिक्रमण हटाने या राजस्व रिकॉर्ड की जांच को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने मांग की है कि सार्वजनिक रास्ते को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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