नेपाल बाढ़ में 288 भारतीय लापता, जयशंकर ने संभाला रेस्क्यू ऑपरेशन; भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री

HIGHLIGHTS
- लापता भारतीयों में त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट के 73 कर्मचारी शामिल
- कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीयों से संपर्क नहीं
- विदेश मंत्रालय नेपाली अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में
नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा और आसपास के क्षेत्रों में बुधवार को आई अचानक भीषण बाढ़ से भारी तबाही हुई है। इस आपदा के बाद 288 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें त्रिशूल पावर परियोजना में काम करने वाले 73 भारतीय कर्मचारी भी शामिल हैं। लापता भारतीयों में बड़ी संख्या कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की है।
भारत ने इस कठिन समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़े रहने की प्रतिबद्धता दोहराई है। राहत और बचाव अभियान विदेश मंत्री एस. जयशंकर की निगरानी में चल रहा है।
विदेश मंत्री संभाल रहे ऑपरेशन का मोर्चा
जयशंकर ने विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय की टीम और काठमांडू व बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूतों के साथ समीक्षा बैठक की है, ताकि बचाव अभियान को समन्वित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की स्थिति और कुशलता की जानकारी जुटाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और परियोजना अधिकारियों के साथ संपर्क में है। भारत इस मामले और राहत कार्यों को लेकर नेपाली पक्ष के साथ भी नजदीकी समन्वय कर रहा है। राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है।
हालांकि, चुनौती इस सहायता को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने और आपदा प्रभावित इलाकों तक पहुंच बनाने की है। भारतीय विदेश मंत्रालय को ‘ग्राउंड जीरो’ से मिल रही सीमित जानकारी के अनुसार, स्थानीय स्तर पर रसुवा, नुवाकोट और बिदुर आदि क्षेत्रों में मलबा हटाना सबसे जरूरी और प्राथमिकता वाला काम है।
त्रिशुली बाजार और बिदुर के आसपास नदी किनारे बसे गांव, बाजार और दुकानें कीचड़ में दब गए हैं। नेपाल सरकार के पास इन इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए पर्याप्त उपकरण और मानव बल नहीं है। बड़े स्तर पर राहत अभियान शुरू होने में अभी एक-दो दिन का समय लग सकता है।
288 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने राहत अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान जानकारी के अनुसार 288 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 भारतीय भी शामिल हैं।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास परियोजना प्रमुख के संपर्क में है, ताकि इन लोगों के बारे में और जानकारी जुटाई जा सके। प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप होने के कारण जमीन पर मौजूद लोगों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के 37 और 49 नागरिकों के दो अलग-अलग समूह सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
रसुवा जिले के तिमुरे में पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिक सम्राट ट्रैवल्स के साथ गए थे। आपदा के समय ये लोग वहीं मौजूद थे और इनके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। विभिन्न राज्यों के 61 भारतीय नागरिक रिचा टूर्स के जरिए गए थे, जिनमें केरल के 33 भारतीयों का एक समूह भी शामिल है।
इन पांच प्रमुख समूहों में कुल करीब 288 लोग शामिल हैं। राहत की बात यह है कि दोपहर एक बजे तक तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों के एक दल को बचा लिया गया था। दूतावास और राजदूत ने समूह के लोगों से बात की और हर संभव मदद का भरोसा दिया। ये लोग काठमांडू जा रहे हैं और जल्द ही उन्हें घर वापस भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
भारत से अब तक 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी गई
आपदा के 24 घंटे के भीतर बुधवार रात भारतीय वायुसेना का सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा। इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और जरूरी दवाएं शामिल थीं।
गुरुवार को दूसरी उड़ान के जरिए 37.5 टन मानवीय सहायता, दवाइयां और खाद्य पैकेट भेजे गए। इस तरह भारत अब तक नेपाल को करीब 47.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है। आगे भी सहायता भेजने की तैयारी की जा रही है।
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