ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को रद्द करने की मांग की, SIR पर भी उठाए सवाल

HIGHLIGHTS
- उन्होंने SIR के तहत 10 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया।
- INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन से अलग रहने की बात कही।
- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के बंटवारे पर जोर दिया।
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। ओवैसी ने नियुक्ति प्रक्रिया में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भी शामिल करने की बात कही।
ओवैसी के मुताबिक, जब यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, तब भी उन्होंने इसके प्रावधानों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इससे भारतीय जनता के बीच चुनाव आयोग की विश्वसनीयता कम हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को सेवानिवृत्ति के बाद कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान है। ओवैसी ने कानून को रद्द कर नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव करने की मांग की।
एसआईआर पर भी उठाए सवाल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने पूछा कि आखिर यह प्रक्रिया कहां से आई। उन्होंने दावा किया कि 10 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। इसके बावजूद फॉर्म-6 के आवेदनों की प्रक्रिया में आवेदकों की मैपिंग पर जोर दिया जा रहा है। ओवैसी ने एसआईआर को बंद करने की भी मांग की।
INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन पर बोले- मैं इसका हिस्सा नहीं
INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन पर ओवैसी ने कहा कि विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सुप्रीम कोर्ट भी इस अधिकार की बात कह चुका है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उसके कार्यक्रम को लेकर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
सीजेआई से मुलाकात पर उठाया शक्तियों के पृथक्करण का सवाल
INDIA ब्लॉक के नेताओं की मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की पहल पर ओवैसी ने शक्तियों के पृथक्करण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सांसद होने के नाते वे कार्यपालिका का हिस्सा नहीं हैं और अगर उन्हें कोई शिकायत है, तो वह प्रधानमंत्री से है। उन्होंने सवाल किया कि सांसद मुख्य न्यायाधीश से कैसे मिल सकते हैं।
ओवैसी ने कहा कि कुछ दिन पहले 'वन नेशन, वन इलेक्शन' से जुड़ी स्थायी समिति भी सुप्रीम कोर्ट से मिलने की कोशिश कर रही थी। उस समय भी शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत को लेकर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने जोर दिया कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका अलग-अलग संस्थाएं हैं और उनके बीच इस अंतर का ध्यान रखा जाना चाहिए।
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