सीजेपी का केंद्र पर हमला, रांका बोले- ज्ञानेश कुमार को बचाने में जुटी सरकार

HIGHLIGHTS
- CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भाजपा को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।
- आशुतोष रांका ने अभिजीत दिपके की दादी के निधन के बाद दिल्ली पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए।
- सौरव दास ने हिरासत के दौरान मोबाइल फोन की जांच किए जाने की आशंका जताई।
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने रविवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान पार्टी के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए।
आशुतोष रांका ने कहा कि पिछले 72 घंटों में देश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। रांका ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी देश को बचाने और आगे बढ़ाने की है, लेकिन वह समझौता कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा को चुनाव जिताने के लिए काम कर रहे हैं।
मोदी-शाह ने चुनाव आयोग की लड़ाई को अपने खिलाफ बना लिया: रांका
आशुतोष रांका ने कहा कि उनकी पार्टी का विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ था, लेकिन अब यह लड़ाई केंद्र सरकार के खिलाफ होती जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार किसी भी कीमत पर ज्ञानेश कुमार को बचाना चाहती है।
रांका ने कहा, "मोदी ने यह साफ कर दिया है कि वह कुछ भी करके ज्ञानेश कुमार को बचाएंगे।" उन्होंने चुनाव आयोग पर केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार काम करने का आरोप भी लगाया। सीजेपी नेता ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार भाजपा को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।
अभिजीत दिपके की दादी के निधन का जिक्र कर पुलिस पर लगाए आरोप
आशुतोष रांका ने बताया कि शनिवार को अभिजीत दिपके की दादी का निधन हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसकी जानकारी मिलने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने अमानवीय व्यवहार किया।
रांका ने कहा, "जब उन्हें उनकी मौत के बारे में बताया गया तो दिल्ली पुलिस ने बहुत ही अमानवीय तरीके से व्यवहार किया। मुझे शर्म आती है कि इस देश की राजधानी की पुलिस ने इस तरह का व्यवहार किया। जब दिपके को उनकी दादी की मौत के बारे में बताया गया, तब भी दिल्ली पुलिस के जवान कैमरे और माइक लेकर वहां खड़े थे। उन्होंने इस घटना को भी तमाशा बनाने की कोशिश की।"
उन्होंने बताया कि दिपके बार-बार कह रहे थे कि उनके माता-पिता बहुत जल्दी घबरा जाते हैं और वे हृदय रोग के मरीज हैं। दिपके ने पुलिस से अपने चचेरे भाई से बात करने देने की अपील की थी, जो उस समय गांव में मौजूद था। वह उससे बात करके घटना के बारे में समझना चाहते थे, लेकिन रांका के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उनकी बात नहीं मानी।
रांका ने कहा कि देश में ऐसे हालात बन गए हैं कि किसी करीबी की मृत्यु के बाद भी लोग संवेदनहीन व्यवहार कर रहे हैं।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक सरकार और पिनाराई विजयन का भी जिक्र किया। रांका ने कहा कि इन चारों नेताओं ने शनिवार को देश के छात्रों और युवाओं के साथ सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ाई लड़ी। इसके लिए उन्होंने सभी का आभार जताया।
सौरव दास ने मोबाइल फोन की जांच और हैकिंग की आशंका जताई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरव दास ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें आरकेपुरम थाने में रखा गया था, जबकि आशुतोष रांका और अभिजीत दिपके को दूसरी जगहों पर रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि तीनों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया।
सौरव दास ने आशंका जताई कि पुलिस उनके मोबाइल फोन अपने कब्जे में लेकर उनमें सबूत डाल सकती है। उन्होंने यह भी संदेह जताया कि पुलिस ने उनके फोन की जांच की है।
दास ने कहा, "देश भर में खुली इमरजेंसी जैसी स्थिति है। ऐसे हालात आखिरी बार 1975 में तानाशाही शासन के दौरान देखे गए थे।"
दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों पर उठाए सवाल
सौरव दास ने दावा किया कि पिछले तीन से चार दिनों के दौरान पूरी दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है। उनके मुताबिक, 30 हजार से 40 हजार सुरक्षा कर्मियों को बुलाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, बंगाल और कश्मीर से जवानों को दिल्ली लाया गया है। इनमें सीमा क्षेत्रों से एयरलिफ्ट करके लाए गए बीएसएफ के जवान भी शामिल हैं। उन्होंने शहर में 40 हजार से अधिक जवानों की तैनाती और भारी पाबंदियां लगाए जाने का दावा किया।
दास ने कहा कि ऐसी व्यवस्था से आम लोगों को भी परेशानी हो रही है। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश में उन नागरिकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जो प्रदर्शन में शामिल नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने, दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रोकने, राजधानी एक्सप्रेस रद्द करने और दुकानों को बंद रखने जैसे कदमों से आम लोग प्रभावित हो रहे हैं।
दास ने कहा कि रविवार को कई लोग सामान्य रूप से अपने काम के लिए बाहर निकलते हैं, ऐसे में दुकानों को बंद करने का क्या मतलब है। उन्होंने दावा किया कि सरकार का अंत नजदीक है और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश कर रही है।
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