शरीर अंदर से कितना बूढ़ा है? वैज्ञानिकों ने बनाया जैविक उम्र पता लगाने वाला ‘PASTA’ टूल

HIGHLIGHTS
- शोधकर्ताओं ने कोशिकाओं की जैविक उम्र का अनुमान लगाने वाला नया टूल विकसित किया।
- ‘पास्ता’ टूल कोशिकाओं में जीन की एक्टिविटी का विश्लेषण करता है।
- अध्ययन के लिए स्वस्थ लोगों के 17,000 से अधिक टिश्यू सैंपल का डेटा इस्तेमाल किया गया।
विज्ञान के क्षेत्र में हर दिन नई खोजें हो रही हैं, जिनसे जीवन के चक्र को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है। अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका विकसित किया है, जिसकी मदद से जैविक उम्र को भी मापा जा सकता है। यह तकनीक शरीर के अंदर होने वाली प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देगी और यह समझने में मदद करेगी कि शरीर अंदर से कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है।
पास्ता टूल लगाएगा जैविक उम्र का पता
शोधकर्ताओं ने एक ऐसा टूल विकसित किया है, जो कोशिकाओं की जीन एक्टिविटी का विश्लेषण कर यह पता लगा सकता है कि कौन से जीन सक्रिय हैं और कौन से निष्क्रिय। इसके आधार पर कोशिका की जैविक उम्र का अनुमान लगाया जा सकता है। ‘पास्ता’ नाम के इस टूल पर ‘एडवांस्ड साइंस’ जर्नल में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ है।
यह टूल उन पदार्थों की पहचान करने में भी मदद कर सकता है, जो कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा यह पुरानी और उम्रदराज हो रही कोशिकाओं तथा युवा, स्टेम सेल जैसी कोशिकाओं के बीच अंतर भी पता लगा सकता है।
स्वस्थ लोगों के टिश्यू सैंपल से तैयार किया गया टूल
स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट और स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया कि उम्र बढ़ना कई बीमारियों का एक बड़ा जोखिम कारक है। हालांकि, यह पता लगाने के लिए ऐसे तरीकों की कमी है, जिनसे यह मापा जा सके कि कोशिकाएं कितनी तेजी से बूढ़ी हो रही हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक जैविक उम्र वाली कोशिकाओं में अक्सर डीएनए डैमेज और सेलुलर स्ट्रेस से जुड़े जीन की एक्टिविटी अधिक होती है। इस टूल को तैयार करने के लिए स्वस्थ लोगों से लिए गए 17,000 से अधिक टिश्यू सैंपल के जीन एक्टिविटी डेटा का विश्लेषण किया गया।
इसके बाद शोधकर्ताओं ने सार्वजनिक डेटाबेस से 30 लाख से अधिक जीन प्रोफाइल का विश्लेषण करने के लिए पास्ता टूल का इस्तेमाल किया। इन प्रोफाइल में कोशिकाओं को हजारों दवाओं और जेनेटिक बदलावों के संपर्क में लाया गया था।
विश्लेषण के दौरान ऐसे पदार्थों और जैविक सिग्नलिंग पाथवे की पहचान की गई, जो कोशिकाओं की जैविक उम्र को बढ़ाते या घटाते हुए दिखाई दिए। इनमें से कुछ परिणामों की बाद में इंसानी कोशिकाओं पर किए गए लैब प्रयोगों के जरिए पुष्टि भी की गई।
शोधकर्ता जेरोम सैलिग्नान ने कहा कि इस टूल की मदद से समय के साथ कोशिकाओं में होने वाले बदलावों का पता लगाया जा सकता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारणों को समझने में मदद मिल सकती है।
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