‘विजय को मिले बहुमत साबित करने का मौका’, प्रकाश राज ने किया थलापति का समर्थन

थलापति विजय इन दिनों तमिलनाडु की राजनीति में अपनी पार्टी टीवीके की संभावित जीत को लेकर काफी उत्साहित हैं। हालांकि पार्टी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से पीछे रह गई है। इसी वजह से विजय दो बार राज्यपाल के पास सरकार गठन का दावा पेश करने जा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि वे बहुमत साबित करके आएं।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, कोई भी नेता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर सकता है। लेकिन राज्यपाल द्वारा बार-बार दावे को अस्वीकार किए जाने पर अभिनेता प्रकाश राज ने नाराजगी जताई है और विजय के समर्थन में अपनी बात रखी है।
एक इंटरव्यू के दौरान प्रकाश राज ने कहा कि जनादेश मिलने के बाद किसी भी विजेता दल को सरकार बनाने और विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी माना कि प्रशासनिक अनुभव की कमी वाले नेतृत्व को लेकर कुछ चिंताएं जरूर हैं, लेकिन पहले जनता के फैसले को स्वीकार करना जरूरी है। उनके अनुसार चुनाव परिणामों के पीछे कई कारण हो सकते हैं—जैसे सत्ता विरोधी लहर, लोकप्रियता या सोशल मीडिया प्रभाव—लेकिन इन पर बाद में चर्चा की जा सकती है।
प्रकाश राज ने कहा कि शासन किसी एक व्यक्ति पर आधारित नहीं होता, बल्कि यह पूरी प्रणाली का काम है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि सरकार कैसे चलेगी और प्रशासन कैसे काम करेगा। उन्होंने राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी दल के पास स्पष्ट समर्थन है तो उसे सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए और उसके बाद सदन में बहुमत साबित किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि लोकतंत्र में जनादेश के साथ-साथ राजनीतिक अधिकार भी मिलते हैं, जिन्हें रोका नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया को सदन के अंदर ही तय किया जाना चाहिए, न कि किसी बाहरी स्तर पर।
विजय के विरोधियों को लेकर प्रकाश राज ने कहा कि उन्हें भी धैर्य रखना चाहिए और नए नेतृत्व को अपनी क्षमता साबित करने का मौका देना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शासन केवल मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें पूरी कैबिनेट और प्रशासन की भूमिका अहम होती है। साथ ही उन्होंने वित्त, शिक्षा, कृषि और नौकरशाही के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए।
अंत में प्रकाश राज ने कहा कि उन्होंने विजय के साथ अपने लंबे फिल्मी करियर में काम किया है, लेकिन कभी राजनीति को लेकर बातचीत नहीं हुई। इसी वजह से उनके राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकप्रियता अपने आप में शासन का पैमाना नहीं हो सकती और मतदाताओं को सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।
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