आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होगा BRICS, UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता पर भी समर्थन

HIGHLIGHTS
- भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट के दौरान 50 से ज्यादा ठोस और व्यवहारिक परिणाम सामने आए हैं।
- आतंकवाद के सभी रूपों से मुकाबले और वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार पर सहमति बनी है।
- ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान 30 से अधिक शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
नई दिल्ली। ब्रिक्स समिट 2026 की शुरुआत शनिवार यानी 12 सितंबर 2026 से हो रही है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन के दौरान 50 से अधिक ठोस और व्यवहारिक परिणाम सामने आए हैं। इनमें कई फ्रेमवर्क और एक्शन प्लान भी शामिल हैं। इस साल ब्रिक्स की गतिविधियों के चार प्रमुख स्तंभ लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने बताया कि भारत के लिए सम्मेलन के प्रमुख परिणामों में आतंकवाद की कड़ी निंदा और उसके सभी रूपों से मुकाबले का संकल्प शामिल है। इसके अलावा वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की सदस्यता की दावेदारी के समर्थन पर भी सहमति बनी है।
साझा घोषणापत्र को लेकर बनी थी असमंजस की स्थिति
वेस्ट एशिया की स्थिति को लेकर यूएई और ईरान के बीच मतभेदों के चलते यह स्पष्ट नहीं था कि शिखर सम्मेलन किसी साझा घोषणापत्र के साथ समाप्त होगा या नहीं। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत की अध्यक्षता को मिले समर्थन को देखते हुए सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है।
इससे पहले पश्चिम एशिया के मुद्दे पर मतभेदों के चलते विदेश मंत्रियों की बैठक बिना किसी साझा बयान के समाप्त हुई थी।
एक अधिकारी ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए और पूरे साल करीब 400 बैठकें आयोजित कर भारत की अध्यक्षता ने सभी पक्षों को साथ लाने और आम सहमति बनाने की क्षमता दिखाई है। अधिकारी के मुताबिक, इसके परिणामों से ब्रिक्स देशों के लोगों को लाभ मिला है।
बहुपक्षवाद को मजबूत करने से होगी शिखर सम्मेलन की शुरुआत
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज के तौर पर सामने आया है। उभरती वैश्विक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ के नजरिए और आकांक्षाओं को शामिल करने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शिखर सम्मेलन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाले एक सत्र से होगी। यह सत्र बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा।
सरकार का मानना है कि भारत ने बातचीत और रचनात्मक सहयोग के लिए ब्रिक्स को एक मंच के रूप में स्थापित करते हुए पुल बनाने वाले की भूमिका निभाई है। मंत्रियों और एजेंसियों के प्रमुखों की बैठकों में तैयार किए गए आम सहमति वाले दस्तावेज भी इसकी पुष्टि करते हैं।
30 से ज्यादा शहरों में हुए कार्यक्रम
सरकार के अनुसार, ब्रिक्स की अध्यक्षता पूरे देश का सामूहिक प्रयास रही। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ संस्थानों, उद्योग, शिक्षा जगत, युवाओं, नागरिक समाज और समुदायों ने भाग लिया। इस दौरान 30 से अधिक शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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