राहुल गांधी का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला, कानूनी सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल

HIGHLIGHTS
- कांग्रेस और विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग को लेकर अपनी रणनीति पर चर्चा की।
- विवाद के केंद्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया है।
- राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कानूनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठाया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों का चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध बुधवार को और तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उन्हें चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली कानूनी सुरक्षा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार देश के अकेले ऐसे नागरिक हैं, जिन्हें आजीवन व्यापक कानूनी छूट हासिल है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब इंडिया गठबंधन के दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आजीवन व्यापक कानूनी सुरक्षा क्यों मिली हुई है। इसके जवाब में उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी उनका इस्तेमाल चुनाव 'चुराने' के लिए करते हैं। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है।
इसी मुद्दे को लेकर इंडिया गठबंधन की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। खरगे ने चुनाव आयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत बताते हुए मतदाता सूची में बदलाव से संबंधित मामलों को सार्वजनिक करने की मांग की।
इंडिया गठबंधन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों की?
इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठाई। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर को लेकर सवाल खड़े किए।
खरगे ने दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज की हैं। विपक्ष ने इन आपत्तियों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के भीतर होने वाली चर्चा और अलग-अलग राय संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, एसआईआर से जुड़े फैसले नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
एसआईआर को लेकर खरगे की क्या आपत्ति है?
मल्लिकार्जुन खरगे ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को वापस लेने की मांग की। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और इसका असर वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है।
खरगे ने दावा किया कि 13.3 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि भविष्य में होने वाले चुनावों के लिए एसआईआर से पहले की मतदाता सूची को आधार बनाया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे सूचना, कारण बताने और अपील का प्रभावी अवसर मिलना चाहिए।
पहली बार वोट देने वाले युवाओं के लिए क्या मांग?
मल्लिकार्जुन खरगे ने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों से नए मतदाताओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।
खरगे का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में युवा मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पंजीकरण व्यवस्था को सरल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए।
खरगे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 की भावना के अनुरूप स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग जरूरी है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव की पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही की मांग की।
इंडिया गठबंधन की बैठक में कौन-कौन से दल शामिल हुए?
इंडिया गठबंधन की बैठक में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार, शिवसेना-यूबीटी, राष्ट्रीय जनता दल, माकपा, भाकपा, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, भाकपा-माले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस, मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, विदुथलाई चिरुथिगल काची, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, केरल कांग्रेस-जेकब और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में एसआईआर, मतदाता सूची में बदलाव, चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची में किए गए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक करने और वैध मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की।
राहुल गांधी के बयान के बाद बढ़ा विवाद
राहुल गांधी का ताजा बयान मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के लगातार जारी राजनीतिक विरोध का हिस्सा है। विपक्षी दल एसआईआर और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपनी प्रक्रिया को कानूनी तथा निर्धारित नियमों के अनुरूप बताता है।
इसी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग भी तेज हुई है। एसआईआर की वैधता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के लिए मामला स्वीकार किया है।
ऐसे में विवाद का एक बड़ा हिस्सा मतदाता सूची की प्रक्रिया, चुनाव आयोग की संस्थागत जवाबदेही और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर है।
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