दिल्ली में प्रदर्शन से पहले रेलवे का बड़ा फैसला, कई प्रमुख ट्रेनें रद्द

HIGHLIGHTS
- रेलवे बोर्ड का निर्देश 9 अक्टूबर को सुबह 8:51 बजे जारी होने की बात कही गई है।
- आदेश के तहत 9 अक्टूबर दोपहर 2 बजे के बाद चलने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द करने का निर्देश है।
- प्रयागराज एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति, श्रम शक्ति और शताब्दी एक्सप्रेस के नाम सूची में शामिल हैं।
प्रयागराज। दिल्ली में बड़े राजनीतिक टकराव और व्यापक प्रदर्शन की आशंका के बीच भारतीय रेलवे ने एक अप्रत्याशित कदम उठाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर जारी धरने और 10 अक्टूबर को 'कॉकरोच जनता पार्टी' की ओर से किए गए दिल्ली घेराव के राष्ट्रव्यापी आह्वान के मद्देनजर रेलवे बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत देश के विभिन्न हिस्सों से नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाली कई प्रमुख मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से ही रद्द करने का आदेश जारी किया गया है।
खास बातें
स्रोत स्टेशन से चलने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द रहेंगी।
ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशन से ही रोकने का निर्देश दिया गया है।
आधिकारिक दस्तावेज में स्टेशनों के आसपास संभावित सड़क जाम को वजह बताया गया है।
स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रित करने के इस फैसले से देशभर के लाखों यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर टकराव की स्थिति बनने की आशंका है।
देशभर के जोनल रेलवे को भेजा गया निर्देश
रेलवे के आधिकारिक परिपत्र में नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आसपास भीषण सड़क जाम की आशंका को फैसले की वजह बताया गया है। हालांकि, दैनिक जागरण की विशेष पड़ताल के मुताबिक, यह कदम 10 अक्टूबर को देश के विभिन्न हिस्सों से राजधानी पहुंचने वाले प्रदर्शनकारियों की आवाजाही रोकने के लिए की गई प्रशासनिक तैयारी का हिस्सा है। इस फैसले के बाद देशभर के रेल नेटवर्क पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
सुबह 8:51 बजे रेलवे बोर्ड ने जारी किया गोपनीय सर्कुलर
रेलवे बोर्ड के आंतरिक संदेश नेटवर्क (ICMS) के माध्यम से शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को सुबह ठीक 8:51 बजे कोचिंग निदेशालय (PAMCELL.RB) ने देश के सभी जोनल रेलवे को एक गोपनीय और उच्च प्राथमिकता वाला निर्देश भेजा। यह पत्र सभी जोनल रेलवे के प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधकों (PCOM) और मुख्य यात्री परिवहन प्रबंधकों (CPTM) को भेजा गया था।
संभावित सड़क जाम के आधार पर ट्रेनों को रद्द करने का आदेश
रेलवे बोर्ड के प्रधान कार्यकारी निदेशक/कोचिंग (PED/Coaching) की ओर से जारी पत्र संख्या DTP/2026/10/05 में कहा गया है कि 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आसपास भीषण सड़क यातायात जाम (Severe Road Traffic Congestion) की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
निर्देश के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशनों से रवाना होने वाली उन सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को स्रोत स्टेशन से ही रद्द किया जाना है, जिन्हें 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पहुंचना था।
रेलवे ने 'इमीडिएट एक्शन' की श्रेणी में रखा आदेश
इस निर्देश को सामान्य परिचालन आदेश के बजाय 'इमीडिएट एक्शन' श्रेणी में रखा गया। इसके चलते दोपहर 2 बजे से पहले ही देश के विभिन्न टर्मिनल स्टेशनों पर संबंधित ट्रेनों को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
प्रदर्शनकारियों की भीड़ रोकने की रणनीति की चर्चा
दैनिक जागरण की पड़ताल के अनुसार, रेलवे प्रशासन ने दस्तावेजों में इस फैसले को स्थानीय यातायात जाम और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया है। वहीं, प्रशासनिक और खुफिया सूत्रों के हवाले से खबर में अलग वजह का उल्लेख किया गया है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को एक इनपुट भेजा था। इसमें बताया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे धरने के समर्थन में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आह्वान पर देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग संगठित होकर दिल्ली पहुंच रहे हैं।
क्या इसी वजह से लिया गया फैसला?
नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन मध्य दिल्ली, कनॉट प्लेस और संसद मार्ग के नजदीक स्थित हैं। खबर के मुताबिक, अगर 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर के बीच ये ट्रेनें राजधानी पहुंचतीं, तो बड़ी संख्या में लोगों के दिल्ली के प्रमुख इलाकों में एक साथ पहुंचने की आशंका थी। इससे राजधानी की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।
इसी संभावित भीड़ और राजनीतिक घेराव को रोकने के उद्देश्य से सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय के साथ ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से ही रद्द करने का फैसला लिए जाने की बात कही गई है।
रेलवे का फैसला क्यों माना जा रहा है सख्त?
रेलवे के वरिष्ठ परिचालन विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी स्टेशन या शहर में स्थानीय स्तर पर व्यवधान होने पर आम तौर पर ट्रेनों को गाजियाबाद, आनंद विहार, दिल्ली सराय रोहिल्ला, मेरठ, फरीदाबाद या पलवल जैसे वैकल्पिक स्टेशनों पर समय से पहले समाप्त कर दिया जाता है। इसके अलावा, ट्रेनों के मार्ग में बदलाव भी किया जा सकता है।
हालांकि, इस मामले में न तो ट्रेनों का रूट बदला गया और न ही उन्हें दिल्ली के बाहरी स्टेशनों पर रोकने का विकल्प अपनाया गया। इसके बजाय ट्रेनों को उनके मूल प्रस्थान स्टेशन से ही पूरी तरह रद्द करने का निर्देश दिया गया। खबर में इसे इस आशंका से जोड़कर देखा गया है कि प्रशासन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं के आसपास भी प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोकना चाहता था।
फैसले पर गरमा सकता है राजनीतिक माहौल
ट्रेनों को रद्द करने के फैसले की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ने की आशंका है। कॉकरोच जनता पार्टी और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संगठन इसे लोकतंत्र पर प्रशासनिक हमला बता सकते हैं। संगठन के नेता सरकार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठ रही असंतोष की आवाज से घबराने का आरोप लगा सकते हैं।
इस मुद्दे पर यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या लोकतांत्रिक विरोध को रोकने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रशासन का तर्क, यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता
दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि स्टेशनों के बाहर किसी अप्रिय घटना, भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति पैदा होने से रोकना जरूरी था। उनके मुताबिक, स्टेशन परिसर में अचानक बड़ी संख्या में यात्रियों के पहुंचने से हालात बेकाबू हो सकते थे। इसी वजह से यह कदम एहतियात और जनहित को ध्यान में रखकर उठाया गया।
देशभर के यात्रियों की बढ़ेंगी मुश्किलें
इस फैसले का असर उन लाखों आम यात्रियों पर पड़ने की आशंका है, जिनका राजनीतिक गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों बिहार, बंगाल, झारखंड और ओडिशा के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा दक्षिण भारत से दिल्ली आने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इनमें इलाज के लिए एम्स जाने वाले गंभीर मरीज, प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्र, जरूरी साक्षात्कार के लिए यात्रा कर रहे युवा और त्योहारों की छुट्टियों में घर लौटने वाले परिवार शामिल हैं। अचानक ट्रेनों के रद्द होने से कई यात्री अपने शुरुआती स्टेशनों या रास्ते में ही फंस सकते हैं।
इसका असर प्रयागराज, कानपुर, पटना, लखनऊ, वाराणसी, हावड़ा, मुंबई, भोपाल और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी दिखाई देने की आशंका है।
प्रयागराज से दिल्ली जाने वाली ये ट्रेनें भी रद्द
प्रयागराज से दिल्ली जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस और हमसफर एक्सप्रेस के अलावा मानिकपुर से चलने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, कानपुर से चलने वाली श्रम शक्ति एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस को भी रद्द कर दिया गया है। ये ट्रेनें नहीं चलेंगी।
रिफंड के लिए यात्री ऐसे करें दावा
ट्रेनों के अचानक रद्द होने से यात्रियों को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए रेलवे ने पूरा रिफंड देने की व्यवस्था लागू की है।
शून्य कटौती यानी 100 प्रतिशत रिफंड
रेलवे की ओर से ट्रेन रद्द किए जाने की स्थिति में यात्रियों के किराए से किसी भी तरह का क्लर्कियल या कैंसिलेशन शुल्क नहीं काटा जाएगा।
ऑनलाइन ई-टिकट वाले यात्रियों के लिए
IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से बुक किए गए ई-टिकट का रिफंड अपने आप उसी बैंक खाते या भुगतान माध्यम, जैसे UPI या कार्ड, में जमा हो जाएगा। यह राशि 3 से 5 कार्यदिवसों के भीतर वापस आने की बात कही गई है। ऐसे यात्रियों को अलग से टिकट डिपॉजिट रसीद (TDR) दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी।
PRS काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों के लिए
जिन यात्रियों ने रेलवे आरक्षण काउंटर से टिकट खरीदे हैं, वे निर्धारित प्रस्थान समय से लेकर तय समयसीमा के भीतर किसी भी कंप्यूटरीकृत PRS काउंटर पर अपना मूल टिकट जमा करके पूरा नकद रिफंड प्राप्त कर सकते हैं।
रेलवे प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए प्रभावित यात्रियों से अपील की है कि वे स्टेशनों पर अनावश्यक भीड़ न लगाएं। घर से निकलने से पहले रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपनी ट्रेन की लाइव स्थिति जरूर जांच लें।
प्रकाशन से पहले जरूरी सत्यापन: इस खबर में ट्रेनों के बड़े पैमाने पर रद्द होने, रेलवे बोर्ड के कथित गोपनीय सर्कुलर, खुफिया इनपुट और रिफंड प्रक्रिया से जुड़े विशिष्ट दावे हैं। प्रकाशित करने से पहले रेलवे बोर्ड/IRCTC की आधिकारिक सूचना, पत्र संख्या और संबंधित ट्रेनों की स्थिति की पुष्टि कर लें।
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