महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत, 5 अक्टूबर तक पुलिस कार्रवाई पर रोक

HIGHLIGHTS
- कलकत्ता हाई कोर्ट ने कथित हेट स्पीच मामले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को अंतरिम राहत देते हुए 5 अक्टूबर तक सख्त पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी।
- कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया।
- अदालत ने पुलिस को जांच के दौरान महुआ मोइत्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा को कथित 'हेट स्पीच' मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। अदालत ने उनके खिलाफ 5 अक्टूबर तक किसी भी तरह की सख्त पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह राहत तभी जारी रहेगी, जब महुआ मोइत्रा जांच में पूरा सहयोग करेंगी और अदालत की ओर से तय सभी शर्तों का पालन करेंगी।
अदालत के आदेश के बाद फिलहाल उनकी गिरफ्तारी या अन्य सख्त कार्रवाई पर रोक लग गई है, लेकिन मामले की जांच जारी रहेगी।
महुआ मोइत्रा ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उनके खिलाफ नदिया जिले के होगलबेरिया थाने में दर्ज मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है। उन्होंने पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई पर रोक लगाने और मामले को रद्द करने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने महुआ मोइत्रा को 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है। अंतरिम राहत 5 अक्टूबर तक या अगले आदेश तक लागू रहेगी।
राहत देने का क्या आधार बताया कोर्ट ने?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महुआ मोइत्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, उनमें अधिकतम सजा सात साल से कम है।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में यदि आरोपी जांच में सहयोग करता है तो उसे सख्त कार्रवाई से संरक्षण दिया जा सकता है। इसी आधार पर महुआ मोइत्रा को अंतरिम राहत दी गई।
कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्हें पुलिस के नोटिस का पालन करना होगा और जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होकर पूछताछ में सहयोग करना होगा।
महुआ मोइत्रा और राज्य सरकार ने क्या दलील दी?
महुआ मोइत्रा के वकील अयान भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि सांसद फिलहाल दिल्ली में हैं और संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर महुआ मोइत्रा 13 अगस्त तक वर्चुअल माध्यम से जांच में शामिल हो सकती हैं और इसके बाद 14 अगस्त से व्यक्तिगत रूप से जांच अधिकारी के सामने पेश होंगी।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता सुरोजित नाथ मित्रा ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि महुआ मोइत्रा पहले जारी किए गए चार नोटिसों के बावजूद जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुई थीं।
पुलिस को कोर्ट ने दिए निर्देश
सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा के वकील ने जांच के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इस पर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पुलिस को निर्देश दिया कि जब महुआ मोइत्रा जांच अधिकारी के सामने पेश हों तो उनके साथ किसी तरह की अभद्र घटना नहीं होनी चाहिए।
अदालत ने विशेष रूप से कहा कि अंडे फेंकने जैसी किसी घटना को रोकना पुलिस की जिम्मेदारी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का दायित्व है।
अब इस मामले में अगली नजर 14 अगस्त को होने वाली पूछताछ और 1 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर रहेगी।
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