रेपो रेट स्थिर, फिर भी बाजार में गिरावट; निवेशकों में दिखी अनिश्चितता

HIGHLIGHTS
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों के दिन घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला।
- शुरुआती कारोबार में बाजार में मजबूती रही, लेकिन दिन बढ़ने के साथ निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लगातार ऊपर-नीचे होते रहे।
- अंततः सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में बंद हुए।
- सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,243.34 पर बंद हुआ।
- वहीं, 38 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 49.85…
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों के दिन घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बाजार में मजबूती रही, लेकिन दिन बढ़ने के साथ निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लगातार ऊपर-नीचे होते रहे। अंततः सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में बंद हुए।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं, 38 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत टूटकर 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ।
आरबीआई के नीतिगत निर्णयों के बाद रुपये में भी मजबूती देखने को मिली और यह डॉलर के मुकाबले 79 पैसे की बढ़त के साथ 94.95 (अस्थायी स्तर) पर बंद हुआ। बाजार में विप्रो और हिंडाल्को के शेयरों में करीब तीन-तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
रेपो रेट 5.25% पर स्थिर
बाजार में अस्थिरता की मुख्य वजह आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के ताजा फैसले रहे। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है और मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखा गया है।
महंगाई अनुमान बढ़ने से चिंता
हालांकि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन बाजार धारणा पर उस समय दबाव बढ़ गया जब केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया।
गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण महंगाई पर दबाव बना हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन आपूर्ति बाधाओं और अल नीनो जैसे कारकों पर आरबीआई लगातार नजर बनाए हुए है।
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