विपक्ष के विरोध के बीच रिजिजू का बयान, बोले- किसी के अधिकारों की अनदेखी नहीं हो सकती

HIGHLIGHTS
- मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को बुलाने पर विवाद, टीएमसी के बागी 20 सांसदों की नई पार्टी को आमंत्रित किए जाने के विरोध में कई विपक्षी दलों ने सांकेतिक वॉकआउट किया।
- केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार के फैसले का बचाव किया, कहा कि एनसीपीआई ने लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता का अनुरोध किया है और संसदीय नियमों के तहत सभी संबंधित दलों को आमंत्रित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
- टीएमसी ने आमंत्रण पर सवाल उठाए, महुआ मोइत्रा और सौगत रॉय ने कहा कि बागी सांसदों के विलय और अयोग्यता से जुड़े मामले लंबित हैं, जबकि एनसीपीआई ने सरकार से मिले आधिकारिक निमंत्रण के आधार पर बैठक में शामिल होने का तर्क दिया।
नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) को आमंत्रित किए जाने के फैसले का समर्थन किया है।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने अलग होकर एनसीपीआई का गठन किया है। इन सांसदों को बैठक में बुलाए जाने के विरोध में कई विपक्षी दलों ने सांकेतिक वॉकआउट किया। हालांकि, विरोध दर्ज कराने के बाद वे दोबारा बैठक में शामिल हो गए।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने संसदीय नियमों के तहत ही यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि एनसीपीआई ने लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता की मांग की है, ऐसे में उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि सभी पक्षों को आमंत्रित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
मानसून सत्र को लेकर सहयोग की अपील करते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि सोमवार से शुरू होने वाले सत्र के लिए आठ विधेयक सूचीबद्ध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई अन्य विधायी कार्य आता है तो उसे भी संसदीय नियमों के अनुसार लिया जाएगा। रिजिजू ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी बात रखने का अधिकार है।
उन्होंने यह भी बताया कि सर्वदलीय बैठक में विभिन्न दलों की ओर से रखे गए सुझावों और विचारों को सरकार ने गंभीरता से सुना है। विपक्ष के वॉकआउट को उन्होंने सांकेतिक कदम बताते हुए उम्मीद जताई कि सभी दल सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि चर्चा संख्या बल के आधार पर हो सकती है, लेकिन किसी को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा एनसीपीआई बनाने वाले 20 बागी टीएमसी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था को मंजूरी दिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने विरोध जताया था। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्पीकर ने अभी तक इन सांसदों के विलय को मंजूरी नहीं दी है और उनके खिलाफ अयोग्यता संबंधी याचिकाएं भी लंबित हैं।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि टेबल ऑफिस की सूची में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 28 दर्ज है। उनका तर्क था कि 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग गुट की कोई व्यवस्था नहीं बचती। ऐसे में इन 20 सांसदों को किस आधार पर सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने भी इस निमंत्रण पर आपत्ति जताई।
वहीं, एनसीपीआई नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने बैठक में अपनी मौजूदगी का बचाव करते हुए कहा कि उनकी पार्टी को सरकार की ओर से आधिकारिक निमंत्रण प्राप्त हुआ था, जिसके बाद ही वे बैठक में शामिल हुए।
गौरतलब है कि शनिवार को किरेन रिजिजू ने सुदीप बंद्योपाध्याय समेत एनसीपीआई में शामिल 19 अन्य लोकसभा सांसदों को मानसून सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक के लिए आमंत्रित किया था। इसके साथ ही डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को बैठक के लिए पार्टी के चीफ व्हिप के रूप में मान्यता दी गई थी। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा।
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