भारत मंडपम में जुटेंगे मोदी, पुतिन और जिनपिंग, ब्रिक्स सम्मेलन पर टिकी वैश्विक निगाहें

HIGHLIGHTS
- 12 और 13 सितंबर को होगा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
- रूस ने पुतिन के भारत आने की घोषणा की
- जिनपिंग के बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचने की तैयारी
नई दिल्ली। राजधानी के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को वैश्विक कूटनीति का एक खास नजारा देखने को मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। यह तस्वीर बदलती वैश्विक व्यवस्था की झलक पेश करेगी, जहां भारत रूस और चीन के साथ अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाते हुए अमेरिका के साथ संबंधों में भी संतुलन बनाए हुए है।
इस बार का ब्रिक्स सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संगठन के एजेंडे के साथ-साथ दुनिया की नजर इन तीनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत पर भी रहेगी। मंच पर मोदी, पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी पश्चिमी देशों को यह संदेश देगी कि भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के समर्थन में है। रूस ने पुतिन के भारत आने की घोषणा कर दी है, वहीं जिनपिंग के करीब 400 लोगों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचने की तैयारी की खबर है। हालांकि, चीन की ओर से उनकी यात्रा को लेकर अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
कूटनीतिक यथार्थवाद
चीन के साथ सीमा क्षेत्रों में गतिरोध के बावजूद आर्थिक और बहुपक्षीय मंचों पर बातचीत जारी रखना तथा अमेरिका के सख्त रुख के बीच रूस के साथ ऊर्जा संबंध कायम रखना भारत की कूटनीतिक नीति में यथार्थवाद को दर्शाता है।
डी-डॉलराइजेशन की सुगबुगाहट
ब्रिक्स सम्मेलन का आर्थिक पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा। अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने और डी-डॉलराइजेशन की दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की मांग इस बार और जोर पकड़ सकती है। हालांकि, इस मुद्दे पर भारत का रुख हमेशा संतुलित रहा है।
भविष्य का ब्लूप्रिंट
ब्रिक्स 2026 का यह सम्मेलन यह दिखाने वाला है कि 21वीं सदी की भू-राजनीति अब केवल श्वेत-श्याम या ब्लैक एंड व्हाइट तक सीमित नहीं है। यह ग्रे शेड्स की दुनिया है, जहां देश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए एक साथ कई दिशाओं में संबंध कायम रख सकते हैं। भारत ने इस सम्मेलन की मेजबानी के जरिए यह दिखाया है कि वह भविष्य की वैश्विक व्यवस्था की दिशा तय करने वाले प्रमुख ध्रुव के रूप में उभर चुका है।
ब्रिक्स फैक्ट
- वर्ष 2006 में स्थापना
- पहला शिखर सम्मेलन 2009 में आयोजित हुआ
- वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स में शामिल हुआ
- भारत की अध्यक्षता में 18वां शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को भारत मंडपम में होगा
- मौजूदा सदस्य देश—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इंडोनेशिया
- वैश्विक हिस्सेदारी—दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व
- उद्देश्य—पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले वित्तीय संस्थानों को संतुलित करना, वैश्विक दक्षिण के हितों की रक्षा करना और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करना
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