रोहिणी आचार्य की 11 महीने बाद पटना वापसी, लालू-राबड़ी से मिलकर हुईं भावुक

HIGHLIGHTS
- पिता का आशीर्वाद लेते समय रोहिणी भावुक हो गईं।
- राबड़ी देवी से गले मिलते हुए रोहिणी फफक पड़ीं।
- लालू प्रसाद भी भावुक नजर आए और आंखें पोंछते दिखे।
पटना। करीब 11 महीने तक चले पारिवारिक विवाद के बाद रोहिणी आचार्य गुरुवार को सिंगापुर से पटना लौट आईं। उनके पहुंचने पर हवाईअड्डे पर भावुक माहौल देखने को मिला।
रोहिणी को रिसीव करने के लिए पिता लालू प्रसाद, मां राबड़ी देवी और बड़ी बहन मीसा भारती एयरपोर्ट पहुंचे थे। पिता का आशीर्वाद लेने के लिए जैसे ही रोहिणी उनके पैर छूने के लिए झुकीं, परिवार के सभी सदस्य भावुक हो गए।
राबड़ी देवी से गले मिलते ही रोहिणी फफककर रो पड़ीं। लालू प्रसाद भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और रुमाल से आंखें पोंछते नजर आए। वहीं, मीसा भारती का दुपट्टा भी आंसुओं से गीला हो गया था।
रोहिणी के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में राजद कार्यकर्ता भी एयरपोर्ट पर मौजूद थे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने ‘लालू-राबड़ी जिंदाबाद’ और ‘रोहिणी आचार्य जिंदाबाद’ के नारे लगाए। इसके बाद लालू प्रसाद, कार्यकर्ताओं के हुजूम के साथ रोहिणी को लेकर कौटिल्यनगर स्थित अपने निजी आवास पहुंचे।
पटना पहुंचने के बाद रोहिणी ने कहा कि पिता ने बुलाया, इसलिए वह उनसे मिलने आई हैं। उन्होंने बताया कि लंबे समय के बाद घर लौटी हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुलाकात को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। हालांकि, तेजस्वी यादव से जुड़े सवालों को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया।
रोहिणी ने अपने एक्स हैंडल पर भी लिखा कि वह पिता के पास लौटकर एक बेटी का फर्ज निभाने आ रही हैं। वहीं, मीसा भारती ने भी इसे पूरी तरह पारिवारिक मुलाकात बताया और किसी भी तरह की राजनीतिक अटकलों से बचने की सलाह दी।
अनबन के बाद अब मेलजोल
पिछले वर्ष नवंबर में विधानसभा चुनाव के बाद रोहिणी आचार्य की छोटे भाई तेजस्वी यादव के साथ अनबन हो गई थी। इससे आहत होकर वह सिंगापुर चली गई थीं और उन्होंने मायके से नाता टूटने की कसम खाई थी।
अब उनके घर लौटने के बाद माना जा रहा है कि परिवार के सदस्यों के बीच बनी दूरियां खत्म हो गई हैं या उन्हें दूर करने की पहल निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।
तेजस्वी यादव फिलहाल दिल्ली में हैं। वहीं, संभावना है कि लालू प्रसाद और राबड़ी देवी भी तीन अक्टूबर को दिल्ली में मौजूद रहेंगे। इसी दिन रेलवे में नौकरी के बदले भूमि प्रकरण में उनके खिलाफ आरोप का गठन होना है। ऐसे समय में रोहिणी की वापसी परिवार के लिए आत्मिक संबल मानी जा रही है।
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