सऊदी पर हूतियों का बड़ा हमला, पाकिस्तान ने दी मक्का रक्षा समझौते की चेतावनी

HIGHLIGHTS
- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने सऊदी अरब के समर्थन में अपना रुख स्पष्ट किया।
- मक्का रक्षा समझौते को तीनों देशों के लिए सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था बताया गया।
- मंगलवार को हूतियों ने सऊदी अरब के कई इलाकों में हमले किए।
यमन के हूतियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने के बाद पाकिस्तान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब पर हमला होने की स्थिति में इसे केवल सऊदी अरब की लड़ाई नहीं माना जाएगा।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते का उल्लेख करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि एक सदस्य पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यानी सऊदी अरब पर संकट आने की स्थिति में पाकिस्तान पीछे नहीं हटेगा। हालांकि, पाकिस्तान ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता किसी दूसरे देश पर हमला करने के लिए नहीं है।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने अगस्त में मक्का में रक्षा समझौता किया था। इसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। ख्वाजा आसिफ ने सऊदी अरब के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता दोहराते हुए समझौते को रक्षात्मक बताया और कहा कि यह आक्रामक सैन्य गठबंधन नहीं है।
आखिर क्या हुआ?
मंगलवार को ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब के कई इलाकों को निशाना बनाया। मिसाइलों और ड्रोन से किए गए हमलों में शहरों के अलावा आर्थिक और ऊर्जा से जुड़े ढांचे को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों में कम से कम 73 नागरिक घायल हुए।
हमलों के बाद सऊदी अरब ने भी अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। ऐसे में यमन का संघर्ष अब सऊदी अरब की जमीन और उसके अहम ठिकानों तक पहुंचता नजर आ रहा है।
पाकिस्तान ने हूतियों को क्या चेतावनी दी?
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर यमन के संघर्ष को सऊदी अरब तक फैलाने की कोशिश की गई तो मक्का समझौते में शामिल सामूहिक रक्षा वाली धाराएं लागू हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसे लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।
आसिफ के मुताबिक, पाकिस्तान समझौते की शर्तों के लिए प्रतिबद्ध है और जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब के साथ खड़ा होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हूती हमलों के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच किसी संपर्क की उन्हें जानकारी नहीं है।
क्या पाकिस्तान हूतियों से सीधे युद्ध करेगा?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। ख्वाजा आसिफ ने खुद कहा कि मक्का समझौता आक्रामक समझौता नहीं है। यानी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये अपनी ओर से किसी देश पर हमला नहीं करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि तीनों देशों की संयुक्त सैन्य ताकत अपने आप में किसी हमलावर के लिए बड़ा संदेश है। आसिफ के अनुसार, हर हमले का जवाब सीधे सैन्य कार्रवाई के जरिए देना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमें ईंट का जवाब पत्थर से देने की जरूरत नहीं है।'
हूती सऊदी अरब पर हमला क्यों कर रहे हैं?
हूतियों का कहना है कि उनके हमले सऊदी अरब की ओर से किए गए हालिया हवाई हमलों का जवाब हैं। हूतियों ने आरोप लगाया है कि सऊदी अरब ने उत्तर-पश्चिमी यमन में उनके कब्जे वाले इलाकों पर हमले किए हैं।
सोमवार को हूतियों ने अल हज्म शहर की एक जेल पर सऊदी बमबारी का आरोप लगाया था। उनके मुताबिक, इस हमले में कम से कम 11 लोग मारे गए।
वहीं, सऊदी नेतृत्व वाला अरब गठबंधन एक दशक से अधिक समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन कर रहा है। यही पुराना संघर्ष अब सऊदी अरब की जमीन तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
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