नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को हाईकोर्ट से झटका, अंतरिम राहत खत्म

HIGHLIGHTS
- डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को मामले पर फैसला सुनाया।
- पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे ने की।
- न्यायमूर्ति ओम नारायण राय भी पीठ में शामिल थे।
कलकत्ता। कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी मिलन प्रधान को 2007 के एक आपराधिक मामले में मिली अंतरिम राहत को खत्म कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सिंगल बेंच के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पुलिस को 12 अक्तूबर तक प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया था। पीठ में न्यायमूर्ति ओम नारायण राय भी शामिल थे।
आपराधिक कानून में ऐसी अंतरिम सुरक्षा का प्रावधान नहीं
अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून में आरोपी को इस तरह की अंतरिम सुरक्षा देने का कोई प्रावधान नहीं है। पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी होने की स्थिति में आरोपी जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं, गिरफ्तारी की आशंका होने पर आरोपी अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकता है।
चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति के लिए अलग कानून नहीं हो सकता
डिवीजन बेंच ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति के मामले में अलग तरीके से विचार नहीं किया जा सकता। सिंगल बेंच का आदेश रद्द होने के बाद कांथी एसीजेएम अदालत की ओर से मिलन प्रधान को 7 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश प्रभावी रहेगा।
6 अक्तूबर को होना है नंदीग्राम उपचुनाव
नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्तूबर को होना है, जबकि चुनाव प्रचार 4 अक्तूबर को समाप्त होगा। इससे एक दिन पहले गुरुवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने मिलन प्रधान को 12 अक्तूबर तक राहत दी थी। अदालत ने पुलिस को इस अवधि में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा था कि इस मामले में उन्हें गिरफ्तार न माना जाए।
2007 के मामले में हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप
कांग्रेस नेता मिलन प्रधान के खिलाफ पूर्व मेदिनीपुर जिले के खेजुरी थाने में 2007 का एक मामला दर्ज है। इसमें हत्या और हत्या के प्रयास सहित कई आरोप लगाए गए हैं। यह मामला नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए आंदोलन से जुड़ा है।
18 सितंबर को पूर्व मेदिनीपुर जिला पुलिस ने प्रधान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद खेजुरी थाने के इस मामले में भी उनकी गिरफ्तारी दिखाई गई। 23 सितंबर को कांथी अदालत ने उन्हें 7 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
छह अन्य मामलों को लेकर भी हाईकोर्ट में याचिका
मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 में नंदीग्राम और खेजुरी थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। 22 सितंबर को हाईकोर्ट में छह अन्य मामलों में दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग वाली उनकी याचिका पर सुनवाई हुई थी।
उस समय राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार वापस ले चुकी थी और छठे मामले में प्रधान वांछित नहीं थे।
बाकी पांच मामलों में गिरफ्तारी की जानकारी दी गई
हाईकोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि कांग्रेस नेता मिलन प्रधान को बाकी पांच आपराधिक मामलों के संबंध में गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
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