डॉक्टरों से मारपीट मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को हाई कोर्ट से झटका, जमानत देने से इनकार

HIGHLIGHTS
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने डॉक्टरों से मारपीट मामले में शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे को तुरंत जमानत देने से इनकार किया।
- कोर्ट ने कहा कि कोई भी चुना हुआ प्रतिनिधि नागरिकों पर फाइलों और कुर्सियों से हमला नहीं कर सकता।
- हाई कोर्ट ने मामले की जांच DCP को सौंपते हुए 31 जुलाई तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार, 27 जुलाई को शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे को तत्काल जमानत देने से इनकार कर दिया। रमेश म्हात्रे पर डोंबिवली के एक म्युनिसिपल अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ मारपीट करने का आरोप है।
इस मामले में रमेश म्हात्रे का डॉक्टरों पर हमला करते हुए वीडियो भी सामने आया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि कोई भी निर्वाचित प्रतिनिधि नागरिकों पर फाइलों और कुर्सियों से हमला नहीं कर सकता।
'वोट मांगकर लोगों से मारपीट नहीं कर सकते'
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे से कहा कि वह जनता की सेवा करने का वादा करके वोट मांगते हैं, लेकिन चुने जाने के बाद लोगों के साथ मारपीट करते हैं।
हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच संबंधित जोन के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही 31 जुलाई तक जांच की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा गया है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि DCP जल्द से जल्द जांच अपने हाथ में लें और शिकायतकर्ताओं, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उनके बयान दर्ज करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
पुलिस की कार्रवाई पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने कहा कि घटना के बाद शुरुआत में कोई जांच नहीं की गई और पुलिस ने आरोपी के प्रति असाधारण सम्मान दिखाया।
बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने म्हात्रे का पक्ष लिया और रिमांड के लिए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करने की अनुमति स्थानीय अदालत से मांगी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने आरोपी के प्रति असामान्य सम्मान दिखाया है।
मारपीट के वीडियो का जिक्र करते हुए बेंच ने टिप्पणी की कि म्हात्रे ने आधा सेकंड भी बर्बाद नहीं किया और लगातार डॉक्टर को मारते रहे।
उम्र के आधार पर राहत देने की मांग पर सवाल
कोर्ट में बचाव पक्ष ने कहा कि 73 साल के रमेश म्हात्रे को उम्र को देखते हुए राहत दी जानी चाहिए। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि वीडियो में वह 73 साल के नहीं लग रहे थे और डॉक्टर के साथ मारपीट के दौरान लगभग मेज के ऊपर से कूदते हुए दिखाई दे रहे थे।
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