दो एकड़ से कम जमीन वाले किसान का बेटा बनेगा भारतीय कबड्डी टीम का कप्तान, सुनील मलिक ने रचा इतिहास

HIGHLIGHTS
- सुनील मलिक ने 11 साल की उम्र में कबड्डी खेलना शुरू किया था।
- उन्होंने गांव की बलिदानी जीत सिंह कबड्डी अकादमी में भी अभ्यास किया।
- 2015 और 2016 की जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में उन्होंने पहचान बनाई।
गोहाना। दो एकड़ से भी कम जमीन वाले किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुनील मलिक अब भारतीय कबड्डी टीम की कप्तानी संभालेंगे। गांव भैंसवाल कलां के रहने वाले सुनील ने सीमित संसाधनों और जीवन की चुनौतियों के बीच मेहनत करते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
परिवार के संघर्ष और अपनी मेहनत के दम पर गांव की मिट्टी से शुरू हुआ सुनील का सफर अब भारतीय टीम की कप्तानी तक पहुंच गया है। वह आगामी एशियाई खेलों में भारतीय कबड्डी टीम का नेतृत्व करेंगे।
सुनील के पिता उमेद सिंह छोटे किसान थे और उनके पास दो एकड़ से भी कम जमीन थी। परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद सुनील के खेल के सपने को कमजोर नहीं पड़ने दिया। ऐसे हालात के बीच शुरू हुआ उनका सफर आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
सुनील अपने बड़े भाई विजेंद्र मलिक को अपने खेल करियर का मार्गदर्शक मानते हैं। विजेंद्र खुद कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं और खेल कोटे के आधार पर सीआईएसएफ में नौकरी कर रहे हैं। परिवार के सहयोग और मजबूत इरादों के साथ सुनील लगातार आगे बढ़ते रहे।
गांव से शुरू हुआ कबड्डी का सफर
सुनील ने बचपन में ही गांव की मिट्टी से कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने गांव की बलिदानी जीत सिंह कबड्डी अकादमी में भी अभ्यास किया। शुरुआत में ही प्रशिक्षकों ने उनके खेल को देखकर उनकी प्रतिभा पहचान ली थी।
डिफेंडर के तौर पर खेलने वाले सुनील की पकड़ उनकी प्रमुख ताकत है। मैदान में एक बार विपक्षी खिलाड़ी उनकी पकड़ में आने के बाद उसके लिए निकलना बेहद मुश्किल माना जाता है।
सुनील को उनकी शांत कप्तानी, मजबूत डिफेंस और रणनीतिक फैसलों के लिए जाना जाता है। लगातार अच्छे प्रदर्शन के जरिए उन्होंने पहले राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और फिर प्रो कबड्डी तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान मजबूत की।
वह पूर्वोत्तर रेलवे और भारतीय रेलवे कबड्डी टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। पूर्वोत्तर रेलवे में वह प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय में अवर लिपिक के पद पर कार्यरत हैं।
अब भारतीय कबड्डी टीम की कप्तानी मिलने के बाद गांव भैंसवाल कलां सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कप्तानी तक पहुंचना गांव के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री के OSD गजेंद्र फौगाट ने गांव पहुंचकर किया सम्मान
सुनील के भारतीय कबड्डी टीम का कप्तान बनने पर मुख्यमंत्री के OSD और प्रसिद्ध कलाकार गजेंद्र फौगाट मंगलवार को उनके पैतृक गांव भैंसवाल कलां पहुंचे। उन्होंने सुनील को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया।
इस दौरान गजेंद्र फौगाट ने सुनील की माता गुड्डी देवी को शाल ओढ़ाकर सम्मान दिया और उनका आशीर्वाद लिया।
फौगाट ने कहा कि हरियाणा की मिट्टी ने हमेशा देश को बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर खेलों की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सुनील की माता गुड्डी देवी, भाई विजेंद्र और सुमित, गुरु भूपेंद्र मलिक, सरपंच संदीप मलिक, अंतरराष्ट्रीय कबड्डी प्रशिक्षक सुशील शास्त्री, संजय मलिक और दिनेश शर्मा मौजूद रहे।
सुनील मलिक की खेल उपलब्धियां
- 11 साल की उम्र में कबड्डी खेलना शुरू किया।
- वर्ष 2015 और 2016 में जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर पहचान बनाई।
- प्रो कबड्डी लीग में यू मुंबा और जयपुर पिंक पैंथर्स के लिए खेल चुके हैं।
- प्रो कबड्डी लीग में सफल कप्तानों में शामिल रहे हैं।
- वर्ष 2022-23 के एशियाई खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय टीम का हिस्सा रहे।
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