'कांशीराम की जयंती पर सपा का पीडीए दिवस मनाना नाटकबाजी': मायावती

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सपा का रवैया दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग और बसपा विरोधी रहा है। उनका कहना है कि सपा ने हमेशा बहुजन समाज के संतों, गुरुओं और महापुरुषों के प्रति अपमानजनक और तिरस्कारपूर्ण व्यवहार किया है।
मायावती ने अपने बयान में कहा कि बसपा संस्थापक कांशीराम की जयंती पर सपा द्वारा मनाया गया पीडीए दिवस केवल राजनीतिक दिखावा है और इसका वास्तविक उद्देश्य उपेक्षित वर्गों के वोटों का लाभ उठाना है। उन्होंने कहा कि अन्य विरोधी दल भी इसी तरह अपने स्वार्थ के लिए दिखावा करते हैं, लेकिन सपा का इतिहास विशेष रूप से दलित विरोधी और विश्वासघातपूर्ण रहा है।
सपा का जातिवादी इतिहास
मायावती ने कहा कि सपा और बसपा के गठबंधन के दौरान 1993 में सपा का जातिवादी रवैया स्पष्ट हो गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने दलित और कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोकने की शर्तों का पालन नहीं किया। इसके चलते बसपा को 1 जून 1995 को सरकार से अपना समर्थन वापस लेना पड़ा।
उन्होंने आगे बताया कि अगले दिन लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड में उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया, जो सरकारी रिकॉर्ड और इतिहास में दर्ज है।
अखिलेश यादव पर भी आरोप
मायावती ने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दलित विरोधी रवैया अपनाया। उन्होंने उदाहरण दिया कि कांशीराम के सम्मान में बसपा सरकार ने कासगंज को जिला मुख्यालय का दर्जा देकर कांशीराम नगर बनाया, जिसे सपा सरकार बनने के बाद बदल दिया गया। इसी तरह कांशीराम के नाम पर बनी उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी और सहारनपुर के सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा ने बदल दिया।
मायावती ने इसे बहुजन समाज के साथ विश्वासघात करार दिया।
सपा और सांप्रदायिक राजनीति
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा है। उनके अनुसार सपा सरकारों में सांप्रदायिक दंगों में लाखों परिवार प्रभावित हुए और भाजपा को इसका राजनीतिक लाभ मिलता रहा।
उन्होंने कहा कि सपा और भाजपा दोनों जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति करते रहे ताकि बहुजन समाज और मुस्लिम समुदाय राज्य में असुरक्षित और त्रस्त रहें। मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि सपा ने कांशीराम को जीते-जी सम्मान देना तो दूर, उनके निधन के बाद एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित नहीं किया।
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