न आंदोलनकारियों को बुलाया और न दिया कोई आश्वासन, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया रुख

HIGHLIGHTS
- नीट पेपर लीक मामले को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बैठकों का दौर जारी, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हुई।
- गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच लंबी बैठक में आंदोलन, संसद रणनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा हुई।
- प्रदर्शन में कथित फूट और भीड़ जुटने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज, सरकार ने विपक्षी एकजुटता पर सवाल उठाए।
नीट पेपर लीक मामले को लेकर सड़क से संसद तक जारी विरोध प्रदर्शन के बीच सरकार में सोमवार को बैठकों का दौर चलता रहा। लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बाद कॉकरोच पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने पहली बार स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि वार्ता का प्रस्ताव आंदोलनकारियों की ओर से आया था। एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि सरकार ने न तो आंदोलनकारियों को बातचीत के लिए बुलाया था और न ही उन्हें कोई आश्वासन दिया गया है।
सोमवार को संसद भवन में गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय में दिनभर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। बैठक के बाद सरकार ने आंदोलन को लेकर सतर्क रुख अपनाने और स्थिति पर नजर बनाए रखने की रणनीति के संकेत दिए। शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक में आंदोलन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, किरेन रिजिजू समेत कई अन्य मंत्री भी बैठक में पहुंचे।
आंदोलन की रणनीति पर मंथन
बैठक के बाद एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हैं। उनके अनुसार वास्तविक छात्र नीट परीक्षा के बाद आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं। बैठक में आंदोलन के दूसरे राज्यों तक पहुंचने के प्रभाव और संसद में इस मुद्दे पर अपनाई जाने वाली रणनीति को लेकर भी चर्चा हुई।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद आंदोलन तेज होने से केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। इसी क्रम में आईबी प्रमुख ने गृह सचिव के साथ बैठक भी की।
आंदोलन में फूट की चर्चा तेज
आंदोलन में कथित मतभेद और सोमवार को जुटी भीड़ को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। चर्चा है कि भीड़ आम आदमी पार्टी की ओर से जुटाई गई थी, जिसके चलते कांग्रेस धरनास्थल से दूरी बनाए रही।
वहीं, सोनम वांगचुक को धरनास्थल से हटाए जाने के बाद भूख हड़ताल शुरू करने वाले कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के अचानक अपना फैसला वापस लेने और सोनम की तीन मांगों में शिक्षा मंत्री को हटाने का सीधा उल्लेख नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए गए।
सरकार से जुड़े सूत्रों का मानना है कि विपक्षी दलों के अलग-अलग रुख और आपसी मतभेदों के कारण आंदोलन का प्रभाव एक-दो दिन में कम हो सकता है।
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