किसानों की समस्याओं को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट से मिले विनीत त्यागी, गन्ने के भाव बढ़ाने की मांग

HIGHLIGHTS
- विनीत त्यागी ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए धरातल पर कार्रवाई की जरूरत बताई।
- उन्होंने गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक तय करने की मांग मुख्यमंत्री से की।
- एथेनॉल और चीनी निर्यात की नीतियों का जिक्र करते हुए चीनी उद्योग के लाभ किसानों तक पहुंचाने की बात कही।
मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट परिसर में पहले धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 23 सूत्रीय सुझाव पत्र भेज चुके किसान सेवक विनीत त्यागी ने शनिवार सुबह करीब 10 बजे सिटी मजिस्ट्रेट से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने किसानों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
विनीत त्यागी ने बताया कि स्थानीय स्तर पर पहले उठाई गई किसानों की कई मांगों का समाधान हो चुका है। इसी को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया था।
मुलाकात के बाद किसान चिंतक विनीत त्यागी ने कहा कि किसानों की समस्याओं पर सिर्फ चर्चा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनके समाधान के लिए धरातल पर कार्रवाई भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि गन्ने की फसल पककर तैयार हो गई है और करीब 10 से 15 दिन बाद किसान इसकी कटाई शुरू कर देंगे। ऐसे में सरकार को समय रहते गन्ने का लाभकारी मूल्य घोषित करना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक तय करने की मांग की। विनीत त्यागी के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में किसान की गन्ना उत्पादन लागत करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि चीनी मिलें इतना मूल्य देने की स्थिति में नहीं हैं तो सरकार 500 से 550 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय कर सकती है और बाकी राशि की भरपाई बोनस के माध्यम से की जा सकती है।
विनीत त्यागी ने कहा कि किसानों के मुद्दे उठाने और किसानों की राजनीति करने वालों की कमी नहीं है, लेकिन खेतों में मेहनत करने वाले किसान की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसान की आय और उत्पादन लागत के बीच संतुलन नहीं रहेगा तो इसका प्रभाव कृषि व्यवस्था पर पड़ेगा।
उन्होंने एथेनॉल उत्पादन और चीनी निर्यात से संबंधित नीतियों का भी जिक्र किया। विनीत त्यागी ने कहा कि इन नीतियों से चीनी उद्योग को मजबूती मिली है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जिन नीतियों के माध्यम से देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने का प्रयास किया गया, उनमें बदलाव क्यों किया जा रहा है।
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