सीआरआरआई के सहयोग से दिल्ली की सड़कों की धूल और प्रदूषण पर होगा नियंत्रण

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण और सड़क धूल को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) के साथ समझौता करने का निर्णय लिया है। इस सहयोग के तहत शहर की सड़कों पर एंड-टू-एंड पेविंग तकनीक लागू की जाएगी और हरियाली बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CQAM) के मानकों के अनुरूप की जा रही है।
ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन कुमार चौधरी ने हाल ही में अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रस्तावित समझौते का ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए। एंड-टू-एंड पेविंग तकनीक में सड़क के मुख्य हिस्से के अलावा दोनों किनारों पर पैविंग ब्लॉक्स, कंक्रीट या टाइल्स लगाई जाती हैं। यह तकनीक धूल उड़ने, पानी जमा होने और किनारों के टूटने से बचाने में मदद करती है।
सड़कों और फ्लाईओवरों पर हरियाली बढ़ाने के लिए किनारों और सेंट्रल वर्ज पर पौधारोपण किया जाएगा। PWD इस काम में CQAM के दिशा-निर्देशों का पालन करेगा।
कम हरियाली वाली सड़कों की पहचान और सुधार
PWD जल्द ही सर्वेक्षण करेगा ताकि कम हरियाली वाली सड़कों की पहचान हो सके। योजना के तहत खाली जगहों में पौधारोपण और घास लगाई जाएगी।
PWD के पास कुल 1,440 किलोमीटर लंबी सड़कें हैं। हरियाली बनाए रखने के लिए एक एजेंसी निर्धारित की जाएगी, जो सड़क पर विकसित हरियाली की सुरक्षा और देखभाल करेगी।
हरियाली बढ़ाने और धूल रोकने के कदम
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सड़क किनारों और फ्लाईओवरों पर झाड़ियां और पेड़ लगाए जाएंगे, जैसे बोगन बेलिया, कनेर, क्लीएंड्रा।
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लता वाले पौधे फ्लाईओवर के पिलर के पास लगाए जाएंगे ताकि वे रेलिंग तक बढ़ सकें।
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फुटपाथों की मरम्मत और अतिक्रमण हटाकर लोगों के लिए सुरक्षित बनाया जाएगा।
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सभी स्ट्रीट लाइटों को LED लाइट्स में बदल दिया जाएगा।
धूल और स्वास्थ्य पर प्रभाव
सड़कों से उड़ने वाली धूल गंभीर जन-स्वास्थ्य समस्या है। इसमें पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण शामिल होते हैं, जो सांस, एलर्जी, हृदय और फेफड़ों की बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
CRRI की भूमिका
CRRI सड़क और ढांचागत विकास के लिए वैज्ञानिक सुझाव देने वाली प्रमुख संस्था है। इसके वैज्ञानिक तकनीकी अध्ययन के आधार पर सड़कों और फ्लाईओवरों की सुधार योजनाओं की सिफारिश करते हैं।
इस पहल से दिल्ली की सड़कों पर धूल कम होगी, हरियाली बढ़ेगी और शहरवासियों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
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