परिवहन और MSME के लिए बड़ा फैसला, केंद्रीय कैबिनेट ने ITLA और SGF को दी मंजूरी

HIGHLIGHTS
- सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
- ITLA परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कामों में तालमेल बढ़ाएगा।
- 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन होगा।
नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को परिवहन और लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़े दो अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों की जानकारी दी। कैबिनेट ने इंटेग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA) की स्थापना और 10,000 करोड़ रुपये के स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज ग्रोथ फंड (SGF) के गठन को मंजूरी दी है।
ITLA का उद्देश्य परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े क्षेत्रों में अनुसंधान, योजना, मूल्यांकन, निगरानी और प्रभाव आकलन को मजबूत करना है। इसके जरिए परिवहन परियोजनाओं की योजना, मूल्यांकन और निगरानी में बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जाएगा। यह प्राधिकरण नीति अनुसंधान, परियोजना योजना एवं मूल्यांकन, निगरानी एवं समीक्षा और डेटा विश्लेषण को एक साथ लाएगा। ITLA भारत में एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स योजना के लिए राष्ट्रीय शीर्ष संस्था के तौर पर काम करेगा।
वहीं, SGF लघु एवं मध्यम उद्यमों में इक्विटी निवेश के लिए 10,000 करोड़ रुपये का कोष होगा। इसका उद्देश्य उच्च क्षमता वाले लघु एवं मध्यम उद्यमों को दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराना है। यह कोष ऐसे उद्यमों को बढ़ावा देगा, जिनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता साबित हो चुकी है और जिनमें विस्तार की क्षमता है।
ITLA बनाने का क्या है उद्देश्य?
नए प्राधिकरण की स्थापना परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल के लिए की जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य अनुसंधान, योजना, मूल्यांकन, निगरानी और प्रभाव आकलन को मजबूत करना है।
ITLA भारत सरकार की 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगा। इसके जरिए एकीकृत बहु-मॉडल योजना सुनिश्चित करने पर जोर होगा। इसके अलावा, यह राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, 2022 की समीक्षा और उसे अपडेट करने में सलाह एवं सहायता भी देगा।
इस तरह काम करेगा ITLA
ITLA सड़क, रेलवे, बंदरगाह, विमानन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय शिपिंग, शहरी गतिशीलता और लॉजिस्टिक्स को शामिल करते हुए दीर्घकालिक परिवहन योजना तैयार करेगा।
प्राधिकरण 500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परिवहन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी करेगा। साथ ही समस्याओं के समाधान के लिए समन्वय और परियोजना पूरी होने के बाद उसके प्रभाव का आकलन भी किया जाएगा।
ITLA जीएसटीएन ई-वे बिल, फास्टैग, वाहन, जीपीएस और शहरी यातायात से जुड़े डेटा को एकीकृत करके राष्ट्रीय परिवहन डेटा भंडार तैयार करेगा। साक्ष्य-आधारित परियोजना योजना के लिए माल-प्रवाह और मूल-गंतव्य विश्लेषण का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा, यह लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में प्रशिक्षण, कौशल विकास और क्षमता निर्माण को भी समर्थन देगा।
SGF से किन उद्यमों को मिलेगा लाभ?
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित SGF का उद्देश्य लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए वृद्धि पूंजी की कमी को दूर करना है। इसका लक्ष्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यम तैयार करना और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।
कोष का अधिकांश आवंटन विनिर्माण-केंद्रित लघु एवं मध्यम उद्यमों को दिया जाएगा। इसके साथ ही सेवा, प्रौद्योगिकी, नवाचार-संचालित क्षेत्रों और रणनीतिक मूल्य श्रृंखलाओं में काम करने वाले उद्यमों को भी समर्थन मिलेगा।
SGF के जरिए उच्च क्षमता वाले लघु एवं मध्यम उद्यमों को दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें अपने कारोबार का विस्तार करने में मदद मिल सके।
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