दिल्ली के बारापुला एलिवेटेड रोड फेज-3 पर भीषण जाम, 2.5 किमी तक लगी वाहनों की कतार

HIGHLIGHTS
- मयूर विहार से करीब एक किलोमीटर बाद ही वाहनों की कतार शुरू हो रही है।
- नए और पुराने बारापुला एलिवेटेड रोड के मर्जर पर ट्रैफिक सिमट रहा है।
- पांच लेन का यातायात पुराने दो लेन वाले कॉरिडोर में मिल रहा है।
दिल्ली के बारापुला एलिवेटेड रोड फेज-3 पर इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। मयूर विहार से आगे बढ़ने के करीब एक किलोमीटर बाद ही वाहनों की कतार शुरू हो रही है। नए बारापुला एलिवेटेड रोड के पुराने बारापुला एलिवेटेड रोड से जुड़ने वाले स्थान पर बॉटलनेक बनने के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है।
नए और पुराने बारापुला एलिवेटेड रोड के मर्जर प्वॉइंट पर पांच लेन का ट्रैफिक पुराने दो लेन वाले बारापुला एलिवेटेड रोड पर आकर सिमट रहा है। इसके चलते इस हिस्से में वाहनों की रफ्तार कम हो रही है और जाम की स्थिति बन रही है।
बारापुला फेज-3 के खुलने के बाद बुधवार से शुक्रवार तक नए कॉरिडोर पर लगातार जाम की स्थिति रही। मयूर विहार से दक्षिणी दिल्ली की तरफ जाने वाली लेन में करीब 2.5 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। अगले दिन हालात और खराब हुए और जाम पीछे मयूर विहार के प्रवेश बिंदु तक पहुंच गया।
इसके बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी ने ड्रोन सर्वे किया। इसमें कॉरिडोर से जुड़ी कुछ ढांचागत खामियां सामने आईं।
ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या नए एलिवेटेड रोड की क्षमता से ज्यादा उसके पुराने बारापुला फेज-1 से जुड़ने के तरीके में है। कॉरिडोर में तीन जगह लगातार ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है। अलग-अलग दिशाओं से आने वाला यातायात कुछ दूरी के भीतर कम लेन में सिमट जाता है। ऐसे में तेज आवाजाही के लिए तैयार किया गया नया कॉरिडोर ही वाहनों की लंबी कतार में बदल जाता है।
ब्रेकर नंबर-1: 90 डिग्री का मोड़ बना पहला बॉटलनेक
नया बारापुला फेज-3 सन डायल के पास करीब 90 डिग्री के मोड़ से पुराने बारापुला फेज-1 से जुड़ता है। यहां तीन लेन से आने वाला नया ट्रैफिक पुराने दो लेन वाले एलिवेटेड रोड पर पहुंचता है। लेन कम होते ही वाहनों की गति घट जाती है और पीक ऑवर्स में लंबी कतार लगने लगती है।
ब्रेकर नंबर-2: सराय काले खां का लूप बढ़ा रहा दबाव
पहले बॉटलनेक के कुछ ही दूरी बाद सराय काले खां की तरफ से आने वाला दो लेन का लूप पुराने बारापुला फेज-1 में जुड़ता है। इस स्थान पर अलग-अलग दिशाओं से आने वाला ट्रैफिक दो लेन में सिमट जाता है।
फेज-3 से आने वाला यातायात जुड़ने के बाद पहले से दबाव वाले इस हिस्से में वाहनों का भार और बढ़ जाता है।
ब्रेकर नंबर-3: 500 मीटर आगे फिर जुड़ता है दो लेन का ट्रैफिक
दूसरे बॉटलनेक से करीब 500 मीटर आगे डीएनडी-महारानी बाग की ओर से आने वाला दो लेन का ट्रैफिक लूप के जरिए बारापुला कॉरिडोर में शामिल होता है। एम्स और आईएनए की ओर जाने वाले वाहन भी इसी हिस्से से चढ़ते हैं।
पहले से धीमे चल रहे यातायात में अतिरिक्त वाहनों के शामिल होने से जाम और लंबा हो जाता है।
ड्रोन सर्वे के बाद ट्रैफिक पुलिस ने सुझाए तीन उपाय
- मर्जर प्वॉइंट की ज्यामिति में बदलाव: सूर्य घड़ी के पास मर्जर प्वॉइंट की संरचना में बदलाव कर मोड़ को अधिक सरल बनाने का सुझाव दिया गया है।
- मर्जिंग प्वॉइंट पर सिग्नल: ट्रैफिक के प्रवाह को नियंत्रित करने और एक साथ ज्यादा वाहनों को प्रवेश करने से रोकने के लिए मर्जिंग प्वॉइंट पर सिग्नल लगाने का सुझाव दिया गया है।
- पुराने बारापुला कॉरिडोर का इस्तेमाल: ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए जरूरत के अनुसार वाहनों को पुराने बारापुला कॉरिडोर की ओर डायवर्ट करने का सुझाव दिया गया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.