मुजफ्फरनगर: बंधुआ मजदूरी से मुक्त 13 वर्षीय बच्चा घर लौटा, पिता हुए भावुक

HIGHLIGHTS
- तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक दोना-पत्तल फैक्ट्री से 22 जून को मुक्त कराए गए 12 बंधुआ मजदूरों के साथ मिला 13 वर्षीय किशोर आखिरकार अपने परिवार से मिल गया।
- करीब डेढ़ साल से लापता बेटे को सामने देखकर पिता मोहम्मद असलम भावुक हो उठे और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
- जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री से रेस्क्यू किए गए नाबालिग को शुरुआत में बाल कल्याण समिति (CWC) के हवाले किया गया था।
- समिति अध्यक्ष रीना पंवार ने बताया कि उस समय बच्चे के परिजनों का कोई पता नहीं चल पाया था, जिसके चलते…
मुजफ्फरनगर। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव स्थित एक दोना-पत्तल फैक्ट्री से 22 जून को मुक्त कराए गए 12 बंधुआ मजदूरों के साथ मिला 13 वर्षीय किशोर आखिरकार अपने परिवार से मिल गया। करीब डेढ़ साल से लापता बेटे को सामने देखकर पिता मोहम्मद असलम भावुक हो उठे और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री से रेस्क्यू किए गए नाबालिग को शुरुआत में बाल कल्याण समिति (CWC) के हवाले किया गया था। समिति अध्यक्ष रीना पंवार ने बताया कि उस समय बच्चे के परिजनों का कोई पता नहीं चल पाया था, जिसके चलते उसे मेरठ स्थित संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। बाद में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कोशिशों से परिवार की पहचान हुई, जिसके बाद रविवार को परिजनों को मुजफ्फरनगर बुलाकर महावीर चौक स्थित CWC कार्यालय में बच्चे से मिलवाया गया।

किशोर मूल रूप से दिल्ली के नरेला इलाके का रहने वाला है। जैसे ही उसने अपने पिता को देखा, वह दौड़कर उनके गले लग गया और रोने लगा। वहां मौजूद परिजन, अधिकारी और स्टाफ भी इस भावुक पल को देखकर खुद को रोक नहीं पाए।
मुलाकात के दौरान किशोर ने बताया कि उसे लंबे समय तक फैक्ट्री में काम करने के लिए मजबूर किया गया। उसके अनुसार, विरोध करने पर मारपीट की जाती थी और खाने के नाम पर बहुत ही कम भोजन दिया जाता था। बेटे की आपबीती सुनकर पिता असलम गहरे सदमे में आ गए।

पिता ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले उनका बेटा अपने चाचा की दुकान पर गया था, लेकिन उसके बाद अचानक लापता हो गया। परिवार ने हर संभव जगह तलाश की और पुलिस से भी मदद मांगी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पाया था।
उन्होंने कहा कि जब पुलिस का फोन आया कि उनका बेटा सुरक्षित मिल गया है, तो पहले उन्हें यकीन नहीं हुआ। बाद में जब वे मुजफ्फरनगर पहुंचे और बेटे से मिले, तो उनकी वर्षों की चिंता एक पल में खुशी में बदल गई।
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