105 साल के बुजुर्ग को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत, उम्रकैद की बाकी सजा माफ कर बंद किया मर्डर केस

HIGHLIGHTS
- रसिक चंद्र मंडल को 1994 में हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था।
- दोषी ठहराए जाने के समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी।
- उन्होंने 99 वर्ष की उम्र में समय से पहले रिहाई की मांग की थी।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए हत्या के दोषी 105 वर्षीय बुजुर्ग को बड़ी राहत दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें जेल से हमेशा के लिए रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए न केवल मामला बंद कर दिया, बल्कि उम्रकैद की बची हुई सजा भी पूरी तरह माफ कर दी।
मामले की सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि भले ही उनकी उम्रकैद की पूरी अवधि समाप्त नहीं हुई हो, लेकिन अब उन्हें दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने 2024 में दिए गए उनके अंतरिम जमानत के आदेश को पूर्ण और अंतिम कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को वर्ष 1994 में एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी। इसके बाद से वह जेल में बंद थे। सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को उन्हें जमानत दी थी। अधिक उम्र होने के कारण वह कई उम्र संबंधी बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।
वर्ष 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने रसिक चंद्र मंडल की सजा को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
99 साल की उम्र में मांगी थी रिहाई
रसिक चंद्र मंडल ने 99 वर्ष की उम्र में अपनी अधिक उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की याचिका दाखिल की थी। इसके बाद मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2024 में उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतरिम जमानत को अंतिम रूप दे दिया है। इस फैसले के बाद 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल बिना किसी कानूनी बंदिश के अपना बाकी जीवन स्वतंत्र नागरिक के तौर पर जी सकेंगे।
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