एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी में थे अजित : किरण गुजर

महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार का 28 जनवरी को एक विमान हादसे में निधन हो गया। गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन के बाद से ही राजनीतिक हलकों में उनकी विरासत और पार्टी के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच उनके एक भरोसेमंद सहयोगी ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अजित पवार एनसीपी के दोनों धड़ों को एक मंच पर लाने की दिशा में आगे बढ़ चुके थे।
किरण गुजर का दावा: विलय लगभग तय था
अजित पवार के करीबी सहयोगी किरण गुजर ने बताया कि दिवंगत नेता राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के एकीकरण को लेकर गंभीर थे और यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। उन्होंने कहा कि यह जानकारी उन्हें खुद अजित पवार ने दी थी।
किरण गुजर, जो कई दशकों से अजित पवार के साथ जुड़े रहे हैं, ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया कि विमान हादसे से करीब पांच दिन पहले अजित पवार ने उन्हें इस योजना के बारे में विस्तार से अवगत कराया था।
चुनावी गठबंधन बना था एकजुटता की बुनियाद
गुजर के अनुसार, दोनों गुटों ने हाल ही में नगर निगम चुनावों में मिलकर चुनाव लड़ा था, जिससे एकजुटता की दिशा मजबूत हुई थी। उन्होंने कहा कि अजित पवार ने स्पष्ट किया था कि सारी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और कुछ ही दिनों में औपचारिक घोषणा की जा सकती थी। अजित पवार ने कुछ पत्रकारों से भी अपनी पार्टी को NCP (SP) में मिलाने की इच्छा जताई थी।
15 जनवरी को पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में हुए नगर निगम चुनावों के बाद दोनों गुटों ने जिला परिषद चुनावों में भी साथ मिलकर उतरने का फैसला किया था। गुजर का कहना है कि अजित पवार ने एकीकृत एनसीपी के लिए भविष्य की रणनीति भी तैयार कर रखी थी।
शरद पवार और सुप्रिया सुले से सकारात्मक बातचीत
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस विषय पर शरद पवार से चर्चा हुई थी, तो किरण गुजर ने कहा कि शरद पवार, सुप्रिया सुले और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ इस मुद्दे पर सकारात्मक बातचीत चल रही थी और ऐसे संकेत मिल रहे थे कि वरिष्ठ पवार इस पहल का समर्थन करेंगे।
चार दशकों पुराना रिश्ता
किरण गुजर पिछले 40 वर्षों से पवार परिवार से जुड़े हुए हैं और अजित पवार के राजनीतिक सफर के हर अहम पड़ाव में उनके साथ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अजित पवार की असमय मौत ने कई सकारात्मक संभावनाओं को अधूरा छोड़ दिया, लेकिन अब उनके जाने के बाद भी पार्टी के एकीकरण की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई है।
राजनीति में प्रवेश की कहानी
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए गुजर ने बताया कि 1981 में छत्रपति सहकारी चीनी मिल का चुनाव जीतने के बाद अजित पवार को राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया गया था। शुरू में वे खेती और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहते थे, लेकिन बाद में जब शरद पवार मुख्यमंत्री बने और बारामती में युवा नेतृत्व की जरूरत पड़ी, तब अजित पवार ने वह जिम्मेदारी संभाली और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
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