मनोज जरांगे की तबीयत बिगड़ी, मेडिकल जांच और पानी लेने से फिर किया इनकार

HIGHLIGHTS
- सरकारी मेडिकल टीम ने स्वास्थ्य जांच के लिए दो बार प्रयास किया।
- जरांगे ने डॉक्टरों से जांच कराने से इनकार कर दिया।
- उन्होंने ड्रिप (IV फ्लूइड) लेने से भी मना किया।
मुंबई। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के नौवें दिन छत्रपति संभाजीनगर के अंतर्वाली सारती में उनकी तबीयत बिगड़ गई। जरांगे ने एक बार फिर मेडिकल जांच कराने, दवा लेने और पानी पीने से इनकार कर दिया है।
दवा और पानी लेने से मना करने के बाद उनके समर्थकों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में बंद और सड़क जाम की आशंका भी बढ़ती जा रही है।
सरकारी मेडिकल टीम ने शनिवार आधी रात से रविवार सुबह के बीच जरांगे के स्वास्थ्य की जांच करने के दो प्रयास किए। लेकिन जरांगे ने स्वास्थ्य परीक्षण कराने के साथ ड्रिप (IV फ्लूइड) लगवाने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों को बिना इलाज किए वापस लौटना पड़ा।
अधिकारियों के मुताबिक, मनोज जरांगे लगातार डॉक्टरों की निगरानी में हैं। हालांकि, हर दो घंटे में उनकी स्थिति की जानकारी लेने पहुंच रही मेडिकल टीम से उन्होंने इलाज कराने से साफ मना कर दिया है।
क्या है जरांगे की मांग?
मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को 11 सितंबर तक का समय देते हुए मांगों पर तत्काल कार्रवाई की चेतावनी दी है। उनकी मांगों में पात्र मराठों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करना और वैधता प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है।
पत्रकारों से बातचीत में जरांगे ने राज्य सरकार पर मराठा आरक्षण के मुद्दे को अटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "सरकार ने कुनबी प्रमाण पत्र दिए तो सही, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित कर दिया कि उन्हें रद कर दिया जाए।"
2 सितंबर को लिया था पानी
29 अगस्त को शुरू हुआ जरांगे का अनशन शुक्रवार रात को उस समय गंभीर हो गया, जब उन्होंने पानी और IV फ्लूइड्स लेना पूरी तरह बंद कर दिया। इससे पहले सरकारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने 2 सितंबर को कुछ समय के लिए पानी और तरल पदार्थ लेना स्वीकार किया था।
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