अयोध्या चढ़ावा केस: आरोपियों ने रकम से खरीदी जमीन, मकान और कार, चार्जशीट में खुलासा

HIGHLIGHTS
- पुलिस ने चार्जशीट में बैंक खातों के लेनदेन का विश्लेषण किया है।
- जमीन और मकान की खरीद से जुड़े भुगतान का भी उल्लेख है।
- कई मामलों में परिजनों के खातों में नकद जमा किए जाने की बात कही गई है।
रामजन्मभूमि चढ़ावा धनराशि प्रकरण की चार्जशीट में पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों, जमीन-मकान, वाहनों, जेवर और अन्य खर्चों का विस्तृत विश्लेषण किया है। पुलिस का दावा है कि गणना कक्ष में दान-चढ़ावे की रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने अपने साथ-साथ परिजनों के खातों और संपत्तियों में भी किया।
अनुकल्प: पिता के 55 लाख के मकान में 25 लाख नकद देने का दावा
चार्जशीट के मुताबिक अनुकल्प मिश्रा के पिता रवींद्र कुमार मिश्रा ने अयोध्या के कौशलपुरी में वंदना द्विवेदी से 55 लाख रुपये में मकान खरीदा। इसमें 29.50 लाख रुपये बैंक के माध्यम से और 25 लाख रुपये लखनऊ में नकद दिए गए, जबकि 50 हजार रुपये बकाया बताए गए।
पुलिस के अनुसार 29.50 लाख रुपये में से 12 लाख रुपये अनुकल्प के खाते से पिता के खाते में भेजे गए। इसके अलावा 17.50 लाख रुपये रिश्तेदारों और परिचितों रामेंद्र, कौशल और राजीव तिवारी को पांच-पांच लाख रुपये नकद देकर उनके माध्यम से बैंक खाते में जमा कराने और 2.50 लाख रुपये रवींद्र द्वारा स्वयं खाते में जमा करने की बात कही गई है।
चार्जशीट में अनुकल्प की ओर से स्विफ्ट डिजायर खरीदने में तीन लाख रुपये नकद देने और भागवत कथा के आयोजन में 7.33 लाख रुपये खर्च करने का भी उल्लेख है। पुलिस के मुताबिक इसी अवधि में उसके खातों में वेतन के रूप में 3.13 लाख रुपये आए।
अविनाश: 6.71 लाख नकद जमा, भाइयों को 18.47 लाख देने का दावा
अविनाश शुक्ला उर्फ शनि ने अपने और परिजनों के अलग-अलग खातों में करीब 6,71,317 रुपये नकद जमा किए। चार्जशीट में बताया गया है कि उसने भाई अभिषेक शुक्ला को ब्रेजा खरीदने के लिए तीन लाख रुपये और भाई आशीष को शादी के लिए छह लाख रुपये दिए।
इसके अलावा अभिषेक के खाते में करीब 4,97,138 रुपये और आशीष के खाते में 2.50 लाख रुपये जमा कराने तथा अभिषेक के ऋण भुगतान के लिए तीन लाख रुपये देने का भी उल्लेख है। इस दौरान अविनाश को वेतन से 1,82,172 रुपये मिलने की बात कही गई है।
लवकुश: पत्नी के नाम 22.52 लाख की जमीन, मकान पर 20.91 लाख खर्च
लवकुश मिश्रा ने अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के बैंक खाते में करीब 14.39 लाख रुपये जमा किए। पत्नी के नाम कमल स्वरूप सिंह से 22.52 लाख रुपये में जमीन खरीदी गई।
पुलिस के अनुसार जमीन और मकान पर कुल 43.43 लाख रुपये खर्च किए गए। सितंबर 2025 से जून 2026 के बीच लवकुश को वेतन के रूप में 1,62,593 रुपये मिले।
करुणेश: परिजनों के खातों में 20.18 लाख नकद
चार्जशीट में करुणेश पांडेय की पत्नी रूपा के एसबीआई खाते में करीब 18.55 लाख रुपये नकद जमा होने का उल्लेख है। इसके अलावा भाई अखिलेश पांडेय के एचडीएफसी खाते में 1,43,100 रुपये और बीओबी खाते में 20 हजार रुपये नकद जमा होने की बात कही गई है।
पुलिस ने कुल करीब 20.18 लाख रुपये को अपराध से अर्जित धन बताया है। इसी अवधि में करुणेश को वेतन से 1.74 लाख रुपये मिलने की बात कही गई है।
रमाशंकर: परिजनों के खातों में 20.92 लाख, 12 लाख का प्लॉट
रमाशंकर मिश्रा के पिता छेदूलाल मिश्रा के दो इंडियन बैंक खातों में 10,80,550 रुपये और 14,500 रुपये जमा होने का उल्लेख है। भाई विवेक शंकर मिश्रा के खाते में 9,43,750 रुपये, मां तारावती के खाते में 39 हजार रुपये और बहन पूर्णिमा के खाते में 15 हजार रुपये जमा होने की बात कही गई है।
पुलिस ने कुल 20,92,800 रुपये को अपराध से प्राप्त धन बताया है। इसके अलावा रमाशंकर ने अपने और परिजनों के नाम 12 लाख रुपये का संयुक्त प्लॉट खरीदा। मोबाइल डाटा में 1.03 लाख रुपये के कैमरे और 22,200 रुपये तथा 2,900 रुपये की अंगूठियां खरीदने की रसीद मिलने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।
मनीष: नियुक्ति के दो महीने में भाई के खाते में दो लाख
मनीष कुमार यादव को 15 अप्रैल 2026 से गणना कक्ष में दान-चढ़ावे की गिनती के काम में नियुक्त किया गया था। पुलिस के मुताबिक उसके भाई सनी यादव के इंडसइंड बैंक खाते में दो लाख रुपये जमा किए गए। इस दौरान मनीष को वेतन से 21,624 रुपये मिले।
टिन्नू: बेटे के नाम 9.50 लाख की संपत्ति, छह लाख की अर्टिगा
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसकी पत्नी के अलग-अलग खातों में कुल 8.48 लाख रुपये नकद जमा किए गए। चार्जशीट के अनुसार 2.46 लाख रुपये की बुलेट, 4.45 लाख रुपये की नकद ज्वैलरी, 2.75 लाख रुपये की पुरानी ज्वैलरी, पुत्र रवि यादव के नाम 9.50 लाख रुपये की संपत्ति और छह लाख रुपये की अर्टिगा खरीदी गई।
चार्जशीट में बैंक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा गया है कि सात सितंबर 2020 से छह जनवरी 2022 तक टिन्नू के एसबीआई खाते में दान-चढ़ावे की रकम जमा की जाती रही। पुलिस ने यह भी कहा है कि इसके बाद भी दानपात्रों की चाबियां उसके कब्जे में बनी रहीं।
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