बालाघाट के 4 बैगा गांवों में अज्ञात बीमारी का कहर, 6 बच्चों की मौत; 47 अस्पताल में भर्ती

HIGHLIGHTS
- प्रभावित गांवों में 1 से 13 साल तक के बच्चों की मौत हुई।
- 47 बच्चे बैहर और बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती हैं।
- 51 स्वस्थ बच्चों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई।
- बच्चों के सैंपल बीमारी की पुष्टि के लिए पुणे की लैब भेजे गए।
बालाघाट। बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बीमारी फैलने से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अडोरी, कुंडेकसा, बोंदारी और कोरका गांवों में अब तक 1 से 13 वर्ष की उम्र के छह बच्चों की मौत हो चुकी है। लगातार बच्चों के बीमार होने की जानकारी के बाद भोपाल तक प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है। बीमारी की जांच के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज से पांच विशेषज्ञों की टीम प्रभावित गांवों में पहुंची है।
पोषण की कमी और दूषित पानी को माना जा रहा प्रमुख कारण
जबलपुर मेडिकल कॉलेज के महामारी विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र विश्नोई के नेतृत्व में पहुंची विशेषज्ञ टीम ने शुरुआती जांच में बच्चों में पोषण की कमी और दूषित पानी को बीमारी की प्रमुख वजह माना है। विशेषज्ञों के मुताबिक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई, जिससे वे संक्रमण की चपेट में आसानी से आ गए।
बीमारी में बच्चों में दिखे कई लक्षण
बीमारी की शुरुआत में बच्चों में शरीर पर दाने निकलने के साथ बुखार, मुंह में छाले, भूख न लगना और झटके आने जैसे लक्षण सामने आए। बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने से ग्रामीण इलाकों में भी चिंता का माहौल बन गया।
हालांकि, बीमारी के सही कारण और संक्रमण की पुष्टि के लिए बच्चों के सैंपल पुणे की लैब में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद बीमारी की वास्तविक स्थिति और इसके कारणों के स्पष्ट होने की उम्मीद है।
47 बच्चे अस्पताल में भर्ती
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में शिविर लगाने के साथ अस्थायी अस्पताल भी बनाए हैं, जहां इलाज शुरू कर दिया गया है। बीमार बच्चों और ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। फिलहाल 47 बच्चे बैहर और बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती हैं। इलाज के बाद स्वस्थ हुए 51 बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।
छह बच्चों की मौत की पुष्टि
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने छह बच्चों की मौत की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट भोपाल भेज दी है। प्रभावित गांवों में प्रशासन की निगरानी में स्वास्थ्य टीमों को तैनात किया गया है।
विशेषज्ञों की टीम बीमारी के कारणों का पता लगाने के साथ-साथ पानी और पोषण की स्थिति की भी जांच कर रही है। सैंपल की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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