बीजापुर: नक्सल गढ़ से विकास की राह पर पीड़िया, आधार शिविर और स्कूल खुलने से बदली तस्वीर

HIGHLIGHTS
- कभी नक्सलवाद के गढ़ रहे बीजापुर के पीड़िया गांव में अब विकास की नई तस्वीर सामने आ रही है।
- विशेष आधार शिविर में 80 ग्रामीणों का आधार पंजीयन और अपडेट का काम सफलतापूर्वक किया गया।
- 21 साल बाद गांव का स्कूल फिर शुरू हुआ, जहां अब 84 बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं।
बीजापुर जिले के गंगालूर तहसील का ग्राम पंचायत पीड़िया, जिसे कभी नक्सलवाद का गढ़ और नक्सलवाद की यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता था, अब विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। लंबे समय तक सुरक्षा कारणों से शासन-प्रशासन की पहुंच से दूर रहा यह गांव अब धीरे-धीरे विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।
31 मार्च 2026 के बाद बदली परिस्थितियों और आवागमन के लिए कच्चे मार्ग बनने से प्रशासन की नियमित पहुंच संभव हो सकी है। इसी क्रम में ग्रामीणों को शासन की मूलभूत सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत पीड़िया में विशेष आधार नामांकन एवं अद्यतन शिविर आयोजित किया गया।
शिविर का संचालन तहसीलदार गंगालूर भोजराम डहरिया और नायब तहसीलदार बीजापुर रवेन्द्र सिन्हा के मार्गदर्शन में किया गया।
दूरस्थ क्षेत्र में ग्रामीणों ने दिखाया उत्साह
नेटवर्कविहीन और दूरस्थ क्षेत्र होने के बावजूद शिविर को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे जरूरी दस्तावेजों के साथ शिविर में पहुंचे।
तकनीकी चुनौतियों के बीच भी 80 ग्रामीणों का आधार पंजीयन और आवश्यक अद्यतन कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इससे ग्रामीणों को भविष्य में शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में मदद मिलेगी।
हिंसा से निकलकर शिक्षा और विकास की ओर बढ़ रहा गांव
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि एक समय पीड़िया गांव नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था। यहां कई बड़े नक्सली नेता प्रशिक्षण के लिए आया करते थे। लेकिन अब वही गांव हिंसा के दौर से बाहर निकलकर शिक्षा, पहचान और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब वे सामान्य और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं तथा उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ भी मिलने लगा है।
21 साल बाद दोबारा खुला विद्यालय, 84 बच्चे कर रहे पढ़ाई
गांव में बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर यहां का विद्यालय है, जो करीब 21 वर्षों तक बंद रहने के बाद फिर से संचालित हो चुका है। वर्तमान में विद्यालय में 84 बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं।
यह केवल स्कूल के दोबारा शुरू होने की बात नहीं है, बल्कि पीड़िया गांव में लौटते विश्वास और नई पीढ़ी के बेहतर भविष्य का संकेत भी है।
ग्राम पंचायत पीड़िया में आयोजित आधार शिविर प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर इस बदलाव का उदाहरण बन गया है कि शासन की सेवाएं अब उन इलाकों तक पहुंच रही हैं, जो लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास से दूर रहे।
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