ब्रिक्स सम्मेलन पर चिदंबरम के सवालों से अलग थरूर की राय, बोले- भारत के लिए अहम कूटनीतिक अवसर

HIGHLIGHTS
- शशि थरूर ने ब्रिक्स सम्मेलन को भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर बताया।
- थरूर ने कहा कि सम्मेलन के दौरान कई विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत होगी।
- पी चिदंबरम ने पिछले ब्रिक्स सम्मेलनों से मिलने वाले स्पष्ट लाभ को लेकर सवाल उठाया था।
नई दिल्ली। देश में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के सवालों पर पार्टी के ही वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अलग राय रखी है। कांग्रेस सांसद थरूर ने ब्रिक्स सम्मेलन का समर्थन करते हुए इसे भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर बताया है।
एक दिन पहले चिदंबरम ने सम्मेलन को लेकर सवाल किया था कि इससे देश को क्या हासिल होगा। इसके विपरीत पूर्व विदेश राज्य मंत्री थरूर ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। उन्होंने प्रेट्र से बातचीत में कहा कि ब्रिक्स देशों के अलावा कुछ पर्यवेक्षक देशों के भी करीब एक दर्जन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री इसमें शामिल हो रहे हैं।
थरूर ने कहा कि ब्रिक्स के अध्यक्ष के तौर पर भारत की जिम्मेदारी है कि वह ग्लोबल साउथ की चिंताओं को सामने रखे। इसके साथ ही देश के प्रत्यक्ष राष्ट्रीय हितों का भी बेहद सावधानी से ध्यान रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कई विश्व नेताओं के भारत दौरे के दौरान महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत भी होगी। थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन सभी राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों से मुलाकात करेंगे, जो उनसे मिलने का अनुरोध करेंगे। ऐसे में इन देशों के नेताओं के साथ करीब एक दर्जन महत्वपूर्ण बैठकें हो सकती हैं।
पश्चिम विरोधी मंच के रूप में ब्रिक्स को देखना भारत के हित में नहीं
थरूर ने कहा कि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देश इस समूह को पश्चिम विरोधी मंच के तौर पर देखने में सहज हैं, लेकिन भारत के राष्ट्रीय हित के लिहाज से यह नजरिया सही नहीं है।
उन्होंने भारत की ओर से ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी के कूटनीतिक महत्व को भी रेखांकित किया। थरूर ने कहा कि यह वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक आयोजन क्षमता को प्रदर्शित करता है और इसका अपने आप में महत्व है।
चिदंबरम ने सम्मेलन को लेकर उठाए थे सवाल
थरूर की यह टिप्पणी एक दिन बाद आई है, जब पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ब्रिक्स सम्मेलन पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पिछले दो-तीन ब्रिक्स सम्मेलनों से उन्हें कोई स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला लाभ नजर नहीं आया।
चिदंबरम ने कहा था कि भारत ब्रिक्स के साथ-साथ एससीओ, जी-20 और क्वाड का भी सदस्य है, लेकिन सवाल यह है कि इनसे देश को क्या लाभ मिल रहा है।
चिदंबरम के बयान पर भाजपा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारत की बढ़ती ताकत से 'नाराज फूफा' फिर नाराज हो गए हैं।
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