कोलकाता में भाजपा का विरोध प्रदर्शन, संदीपन साहा पर लगाए गंभीर आरोप

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा नेता प्रियंका टिबरेवाल ने गुरुवार को कोलकाता के एंटाली इलाके में निष्कासित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता संदीपन साहा के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने संदीपन साहा और उनके पिता, टीएमसी नेता स्वर्ण कमल साहा पर जमीन कब्जाने और वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए।
प्रदर्शन के दौरान एक अनोखा नज़ारा भी देखने को मिला, जब कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर दो गधों को साथ लाया, जिन पर कथित रूप से संदीपन साहा और उनके पिता की तस्वीरें लगाई गई थीं। यह प्रदर्शन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
भाजपा का तीखा हमला
प्रियंका टिबरेवाल ने कहा कि यह प्रदर्शन प्रतीकात्मक रूप से यह दिखाने के लिए किया गया कि आम जनता के अनुसार किस तरह के शोषण के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिता-पुत्र की जोड़ी ने लोगों की जमीनों पर कथित रूप से कब्जा किया और अवैध वसूली की गतिविधियों में शामिल रहे।
हालांकि इन आरोपों पर संदीपन साहा या टीएमसी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
टीएमसी के अंदरूनी हालात पर बयान
टीएमसी में चल रहे कथित आंतरिक मतभेद और संगठनात्मक हलचल पर टिप्पणी करते हुए टिबरेवाल ने कहा कि जब किसी पार्टी में असंतोष बढ़ता है, तो ऐसे हालात स्वाभाविक रूप से सामने आते हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर उभर रहे गुटों पर भी निशाना साधा।
अभिषेक बनर्जी और ईडी समन पर प्रतिक्रिया
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी समन को लेकर भी टिबरेवाल ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन पर आरोप हैं, उन्हें जनता और जांच एजेंसियों के सामने जवाब देना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने कुछ अन्य मामलों का उल्लेख करते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
टीएमसी में संगठनात्मक बदलाव
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए राज्यभर की सभी समितियों और अग्रिम संगठनों को भंग कर दिया है। पार्टी ने इसे चुनावी प्रदर्शन के बाद की समीक्षा और पुनर्गठन प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
एनआईए जांच और राजनीतिक प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर क्षेत्र में बम विस्फोट मामले की जांच के तहत एनआईए ने टीएमसी नेता शौकत मोल्ला के आवास पर तलाशी और पूछताछ की। इस कार्रवाई को लेकर राज्य की राजनीति में प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
पश्चिम बंगाल के मंत्री तापस रॉय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना चाहिए और बुलाए जाने पर उपस्थित होना चाहिए।
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