दिल्ली में 29 सितंबर को कांग्रेस की ‘दलित-आदिवासी स्वाभिमान बैठक’, SC-ST मुद्दों पर होगी चर्चा

HIGHLIGHTS
- बैठक का आयोजन कांग्रेस एससी/एसटी सांसद मंच करेगा।
- कार्यक्रम कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर हॉल में होगा।
- मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी में जनसभा की थी।
कांग्रेस 29 सितंबर को दिल्ली में ‘दलित-आदिवासी स्वाभिमान बैठक’ आयोजित करने जा रही है। पार्टी के अनुसार, इस बैठक में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें अगस्त में उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण अनुष्ठान का मामला भी शामिल है।
इस बैठक का आयोजन कांग्रेस एससी/एसटी सांसद मंच की ओर से किया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संबंधित विभाग भी इसमें सहयोग करेंगे। कार्यक्रम दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया स्थित मावलंकर हॉल में आयोजित होगा।
खरगे की जनसभा के बाद कथित शुद्धिकरण पर चर्चा
कांग्रेस सांसद मल्लू रवि के मुताबिक, बैठक में हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान के मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी। खरगे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। इसके बाद 10 अगस्त को वहां कथित तौर पर शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
इस मामले को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद सामने आया था। कांग्रेस नेताओं ने इसे दलित समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, भाजपा नेताओं ने कार्यक्रम से पार्टी का संबंध होने से इनकार किया था। केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने कहा था कि आयोजन स्थल पर सफाई और धार्मिक कार्यक्रम को कांग्रेस के कार्यक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने लगाए ‘दलित विरोधी’ और ‘आदिवासी विरोधी’ होने के आरोप
मल्लू रवि ने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न हिस्सों में एससी और एसटी समुदायों से जुड़े लोगों के साथ भेदभाव और अत्याचार के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
कांग्रेस नेता मनोज कुमार ने केंद्र की मोदी सरकार पर ‘दलित विरोधी’ और ‘आदिवासी विरोधी’ होने का आरोप लगाया। उन्होंने देशभर के दलित और आदिवासी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों से 29 सितंबर की बैठक में शामिल होने की अपील की। हालांकि, ये कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें पार्टी के दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए।
एससी/एसटी कानूनों से जुड़े मामलों पर भी होगी चर्चा
बैठक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों से जुड़े भेदभाव और हिंसा के मामलों पर भी मंथन होगा। कांग्रेस के अनुसार, इनमें नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के उल्लंघन की शिकायतें भी शामिल हैं।
पार्टी के मुताबिक, बैठक में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। संसद और राज्य विधानसभाओं के अलावा सार्वजनिक मंचों पर भेदभाव और सामाजिक पूर्वाग्रह के खिलाफ आवाज उठाने की रणनीति पर भी चर्चा होगी।
हल्द्वानी मामले में दर्ज हो चुकी है FIR
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को लेकर उत्तराखंड पुलिस ने सितंबर में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस के अनुसार, इस मामले में करीब 80 शिकायतें और याचिकाएं प्राप्त हुई थीं, जिनमें 19 नैनीताल जिले से थीं।
एफआईआर में बीएनएस की संबंधित धाराओं के साथ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r) भी लगाई गई थी।
इससे पहले कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल उठाए थे। राहुल गांधी ने भी 29 अगस्त को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद उत्तराखंड में उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी।
बैठक में कौन-कौन होगा शामिल?
कांग्रेस के अनुसार, बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के कांग्रेस सांसदों के साथ पूर्व सांसद, कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्री, विधायक और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इस पहल में एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक के. राजू, एआईसीसी एससी विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया भी सहयोग कर रहे हैं।
कांग्रेस का कहना है कि संविधान सभी नागरिकों को सम्मान, गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का अधिकार देता है। पार्टी इसी आधार पर एससी और एसटी समुदायों से जुड़े भेदभाव के मुद्दों को उठाने की बात कह रही है।
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