ई-कार्ट के लिए नगर निगम की जमीन मुफ्त देने पर विवाद, कांग्रेस पार्षदों ने जताया विरोध

HIGHLIGHTS
- कांग्रेस पार्षदों ने जमीन आवंटन की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई।
- बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाए बिना जमीन देने पर सवाल उठाए।
- पार्षदों ने निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया।
उत्तराखंड: कांग्रेस पार्षदों ने आज सहायक नगर आयुक्त महेंद्र यादव का घेराव कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। पार्षदों ने ई-कार्ट के संचालन के लिए नगर निगम की भूमि निशुल्क दिए जाने पर विरोध जताया। पूर्व सभासद अशोक शर्मा और पार्षद सुनील कुमार ने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी बिना सूचना दिए और पार्षदों को विश्वास में लिए बिना निजी कंपनियों को लाभ पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की जमीन एक निजी कंपनी को मुफ्त में सौंप दी जा रही है और अधिकारी अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं।
पार्षद विवेक भूषण विक्की और अरशद ख्वाजा ने सवाल उठाया कि बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाए बिना किसी को नगर निगम की जमीन कैसे दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जो लोग किराये पर जमीन लेने के लिए पैसे देने को तैयार हैं, उन्हें जमीन नहीं दी जा रही, जबकि दूसरी ओर किसी को निशुल्क जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। पार्षदों ने नगर निगम में भ्रष्टाचार होने का आरोप भी लगाया।
जमीन मुफ्त देने के नियम पर उठाए सवाल
पार्षद सुमित त्यागी और पुनीत कुमार ने पूछा कि किस नियम के तहत नगर निगम की जमीन निशुल्क दी गई है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
पार्षदों ने कहा कि यदि जमीन मुफ्त में देनी ही थी, तो किसी स्थानीय विधवा, दिव्यांग या अत्यंत जरूरतमंद व्यक्ति को इसका लाभ दिया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए नगर निगम की संपत्ति को खुर्दबुर्द कर रहे हैं। पार्षदों ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले का विरोध जारी रखेंगे।
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