खडसे दंपती पर कोर्ट सख्त, मनी लॉन्ड्रिंग केस में गैर-जमानती वारंट

महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ा पुणे भूमि घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में मुंबई की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने शुक्रवार को पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे और उनकी पत्नी मांडकिनी खडसे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। आरोप तय होने की सुनवाई में दोनों की अनुपस्थिति को अदालत ने गंभीरता से लिया।
अस्पष्ट आवेदन से नाराज़ अदालत
विशेष अदालत के न्यायाधीश महेश जाधव ने कहा कि खडसे दंपती की ओर से दाखिल उपस्थिति से छूट की अर्जी बेहद अस्पष्ट थी। अदालत के अनुसार, आवेदन में यह नहीं बताया गया कि वे किन कारणों से पेश नहीं हो सके और न ही इसके समर्थन में कोई दस्तावेज लगाए गए। इस लापरवाही को देखते हुए अदालत ने छूट देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपियों को यह पूरी जानकारी थी कि इसी तारीख को आरोप तय किए जाने थे। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए जज ने कहा कि सांसद और विधायकों से जुड़े मामलों में तेजी से कार्यवाही जरूरी होती है, लेकिन इसके बावजूद बिना उचित वजह गैरहाजिर रहना स्वीकार्य नहीं है। इसी आधार पर खडसे दंपती के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। इस केस की अगली सुनवाई 12 फरवरी को तय की गई है। इसी तरह का वारंट उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो के एक अन्य मामले में भी जारी हुआ है।
ईडी की जांच कैसे शुरू हुई
यह मामला तब सामने आया जब प्रवर्तन निदेशालय ने पुणे एसीबी की एफआईआर के आधार पर धन शोधन अधिनियम के तहत जांच शुरू की। ईडी का आरोप है कि वर्ष 2016 में, जब एकनाथ खडसे महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री थे, तब उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पुणे के भोसरी इलाके में स्थित करीब तीन एकड़ की जमीन अपनी पत्नी और दामाद के नाम दिलाने में भूमिका निभाई।
दिसंबर 2024 में अदालत ने खडसे परिवार की डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से प्रथम दृष्टया संकेत मिलता है कि यह संपत्ति ऐसे तरीके से हासिल की गई जो कानून के अनुरूप नहीं थे। कोर्ट ने यह भी माना था कि दस्तावेजों और लेन-देन की प्रकृति से आरोपियों की मंशा स्पष्ट होती है।
31 करोड़ की जमीन 3.75 करोड़ में खरीदने का आरोप
बताया जाता है कि जिस जमीन की बाजार कीमत लगभग 31 करोड़ रुपये थी, उसे खडसे परिवार ने केवल 3.75 करोड़ रुपये में खरीदा। इन आरोपों के बाद वर्ष 2016 में एकनाथ खडसे को भाजपा सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
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