दिल्ली में SIR के तहत दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ी, अब 30 अक्टूबर तक मौका

HIGHLIGHTS
- दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 31 अगस्त से शुरू हुई थी।
- पहले दावे-आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी।
- संशोधित कार्यक्रम दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पत्र के बाद जारी हुआ।
नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा दी है। अब मतदाता 30 अक्टूबर तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। पहले इसकी अंतिम तारीख 30 सितंबर तय की गई थी। अंतिम मतदाता सूची अब चार दिसंबर को प्रकाशित होगी, जबकि पहले इसे चार नवंबर को जारी किया जाना था।
यह संशोधित कार्यक्रम दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से 23 सितंबर को भेजे गए पत्र के बाद जारी किया गया है। पत्र में राष्ट्रीय राजधानी के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण के कार्यक्रम में बदलाव का अनुरोध किया गया था।
संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक, नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा भी एक महीने बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। पहले इस प्रक्रिया को 30 अक्टूबर तक पूरा किया जाना था। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 31 अगस्त से शुरू हुई थी।
समयसीमा में यह बदलाव ऐसे वक्त किया गया है, जब दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है। इससे पहले 97 लाख से अधिक मतदाताओं वाली प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी।
विसंगतियों पर 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस
मतदाता गणना प्रपत्रों में दी गई जानकारी में विसंगतियां मिलने के बाद 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जिनमें मतदाताओं के विवरण का 2002 में हुए पिछले SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया।
इन विसंगतियों में पते से जुड़ी गलतियां या डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल हो सकती हैं। दिल्ली निर्वाचन विभाग ने मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है। यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रमुख मतदाताओं को भी मिले नोटिस
पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख मतदाताओं को भी दिल्ली निर्वाचन विभाग की ओर से नोटिस मिले थे।
अधिकारियों के अनुसार, इनमें से अधिकांश लोगों के विवरण का क्षेत्रीय सत्यापन के माध्यम से सत्यापन किया जा चुका है। उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। यह सत्यापन प्रक्रिया सभी मतदाताओं के लिए समान रूप से लागू की गई।
नोटिस मिलने पर अपना पक्ष रखने का मौका
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया था कि किसी मतदाता को नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाता संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या बूथ स्तर के अधिकारी के समक्ष अपना जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी नाम को मतदाता सूची से हटाया नहीं जा सकता। इसमें संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देना और उचित, कारणयुक्त तथा अपील योग्य आदेश पारित करना भी शामिल है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी मतदाता का नाम मनमाने तरीके से सूची से न हटाया जाए।
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