राम जन्मभूमि पर सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन का बयान वायरल, बोले- असली जगह किसी को नहीं पता

HIGHLIGHTS
- एसटी हसन ने अयोध्या और दक्षिण भारत में राम जन्मस्थान को लेकर अलग-अलग दावों का जिक्र किया।
- उन्होंने कहा कि राम मंदिर मामले में अदालत ने वर्षों पुराने विवाद को समाप्त करने के लिए फैसला सुनाया था।
- पूर्व सांसद ने एएसआई की खुदाई और अदालत में दिए गए बयान का हवाला दिया।
समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में उन्होंने कहा कि किसी को यह जानकारी नहीं है कि भगवान राम का जन्म वास्तव में कहां हुआ था। अयोध्या में 12 से अधिक मंदिर ऐसे हैं, जहां राम के जन्म का दावा किया जाता है। दक्षिण भारत में भी एक अयोध्या है और वहां के लोग भी इसी तरह का दावा करते हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि राम का जन्म असल में किस स्थान पर हुआ था।
राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसटी हसन ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भी अदालत में स्वीकार किया था कि अयोध्या में खुदाई के दौरान मिले स्थल पर किसी मंदिर के अवशेष नहीं पाए गए थे। उनके मुताबिक, अदालत ने वर्षों से चले आ रहे विवाद को समाप्त करने के उद्देश्य से जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया था।
छह दिसंबर 1992 की घटना पर भी दी प्रतिक्रिया
वायरल वीडियो में डॉ. एसटी हसन ने छह दिसंबर 1992 की घटना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने गोलियां चलवाने का आदेश नहीं दिया था।
पूर्व सांसद के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने अदालत में हलफनामा दिया था कि विवादित ढांचे को कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसी वजह से पुलिस ने गोलियां चलाई होंगी। उन्होंने कहा कि इस घटना में 15-16 लोगों की मौत हुई थी, ऐसे में सरयू नदी लाल कैसे हो गई?
अंग्रेजों की नीति का भी किया जिक्र
एसटी हसन ने कहा कि अंग्रेजों ने कई साल पहले समाज में फूट डालो और शासन करो की नीति का बीज बोया था। आज के लोगों को उस विरासत को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ भी रहा जा सकता है।
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