सोना-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, कीमतें नई ऊंचाई पर

नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के बीच सोना और चांदी ने रिकॉर्ड ऊँचाई छू ली है। मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं ने अपने सभी पुराने कीमती स्तरों को पार कर दिया। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अगले साल अमेरिकी फेड की ब्याज दरों में कटौती की संभावना ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षित किया।
एमसीएक्स पर ऐतिहासिक तेजी
घरेलू वायदा बाजार यानी MCX पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,637 रुपये यानी 1.2% की बढ़त के साथ 1,38,381 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो नया सर्वकालिक उच्च स्तर है। यह लगातार दूसरा सत्र है जब सोना तेजी के साथ बंद हुआ।
चांदी की कीमतों में भी उछाल रहा। मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी 3,724 रुपये यानी 1.75% की तेजी के साथ 2,16,596 रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी रिकॉर्ड
विदेशी बाजारों में भी सोने और चांदी ने नए शिखर छुए। कॉमेक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 61.4 डॉलर यानी 1.37% बढ़कर 4,530.8 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा। चांदी ने पहली बार 70 डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा पार किया और 1.59 डॉलर यानी 2.32% की तेजी के साथ 70.15 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।
तेजी के पीछे क्या कारण हैं?
रिलायंस सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के अनुसार, "सोने की कीमतें 4,480 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई हैं। इस तेजी के पीछे अमेरिकी मौद्रिक नीति में ढील की उम्मीदें और भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं।"
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई में कमी और लेबर मार्केट की सुस्ती के बीच फेडरल रिजर्व अगले साल ब्याज दरों में दो बार 0.25% की कटौती कर सकता है। इससे डॉलर कमजोर होता है और सोना-चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों को मजबूती मिलती है।
भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव ने सोने की तेजी में इंधन का काम किया। अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में ब्लॉकade तेज किया, एक तेल टैंकर जब्त किया और तीसरे का पीछा किया। इससे निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से बाहर आकर सोने में निवेश करने लगे।
1979 के बाद सबसे बेहतरीन प्रदर्शन
साल 2025 सोने के लिए ऐतिहासिक साबित हो रहा है। अब तक सोने में 70% की बढ़त दर्ज की गई है, जो 1979 के बाद का सबसे मजबूत वार्षिक प्रदर्शन बन सकता है। केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और ETF में निवेश ने इस रैली को और मजबूत किया है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका की तीसरी तिमाही के GDP आंकड़ों पर टिकी है, जो फेड की नीति और बाजार की दिशा तय करेंगे।
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