यूपी के गांवों में बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी, कई इलाकों में 6 से 8 घंटे ही आपूर्ति

HIGHLIGHTS
- 13 सितंबर को बिजली की मांग 28,834 मेगावाट रही, जबकि उपलब्धता 25,184 मेगावाट दर्ज हुई।
- बिजली की कमी पूरी करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आपात कटौती करनी पड़ी।
- कटौती से आटा चक्की, स्पेलर और अन्य छोटे कारोबार प्रभावित हो रहे हैं।
यूपी: प्रदेश में बिजली कटौती ने ग्रामीण उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे के रोस्टर के मुकाबले 16.41 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया जा रहा है, लेकिन कई गांवों में स्थिति इससे अलग है। कई इलाकों में उपभोक्ताओं को छह से आठ घंटे ही बिजली मिल पा रही है। रात के समय कटौती होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बिजली पर निर्भर लघु एवं कुटीर उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
यूपीएसएलडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 सितंबर को प्रदेश में बिजली की मांग 28834 मेगावाट रही, जबकि उपलब्धता 25,184 मेगावाट थी। इस तरह मांग और उपलब्धता के बीच 3650 मेगावाट का अंतर रहा। इसकी भरपाई के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आपात कटौती की गई। वहीं, 10 सितंबर को अलग-अलग कारणों से 10 उत्पादन इकाइयां बंद हुई थीं। इनमें से कुछ में उत्पादन फिर शुरू हो गया है, लेकिन करीब आधा दर्जन इकाइयां अभी भी बंद हैं।
छोटे कारोबार पर भी पड़ा असर
बिजली कटौती का सीधा असर उन ग्रामीण परिवारों पर पड़ा है, जिनकी आजीविका बिजली से चलने वाले छोटे कारोबार पर निर्भर है। चित्रकूट के खोह निवासी संजय पटेल ने बताया कि बिजली कटौती के कारण आटा चक्की और स्पेलर बंद हैं। यही उनकी आय का मुख्य जरिया हैं।
जौनपुर के मनोज यादव, विजय सिंह और असफाक खां ने बताया कि उनके इलाके में आठ घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। रात में अधिक कटौती होने के कारण घरेलू उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीतापुर के बिसौली निवासी दयाशंकर सिंह के मुताबिक, उनके क्षेत्र में छह से आठ घंटे बिजली मिलने के कारण लघु एवं कुटीर उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। इससे कारोबार का कामकाज प्रभावित होने के साथ लोगों की आय पर भी असर पड़ रहा है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यूपीएसएलडीसी 16.41 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रहा है, जबकि लगातार ब्रेकडाउन और कटौती के चलते उपभोक्ताओं को करीब आठ घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
उन्होंने कहा कि 3650 मेगावाट की आपात कटौती बिजली व्यवस्था की स्थिति को दर्शाती है। सरकार और पॉवर कॉर्पोरेशन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 18 घंटे के रोस्टर के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में इतनी कम बिजली आपूर्ति क्यों हो रही है।
गीले कोयले से भी उत्पादन प्रभावित
पॉवर कॉरपोरेशन के प्रवक्ता के अनुसार, भारी बारिश और जलभराव के कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात समेत कई राज्यों में कोयले की कमी हुई है। यूपी में भी गीले कोयले की वजह से उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। कुछ इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद हैं।
पीक समय में ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में सीमित रात्रिकालीन रोस्टरिंग की जा रही है। कोयले और बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड समेत संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
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