गोंडा: पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह ने यूजीसी नियमों पर फिर जताई चिंता

गोंडा: पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बृहस्पतिवार को यूजीसी के नए नियमों को लेकर फिर से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी कमेटी का नहीं, बल्कि सीधे मंत्रालय का फैसला है। उनके बेटे और सांसद करण भूषण सिंह उस कमेटी का हिस्सा नहीं थे जिसने इस बिल पर फैसला लिया।
पूर्व सांसद ने कहा कि अब अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और दलित समाज के बच्चे भी इस नियम के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि देश में सामाजिक माहौल लगातार बिगड़ रहा है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।
शरण सिंह ने बताया कि उन्होंने यह बयान अपने गांव से दिया क्योंकि वे लंबे समय से देखते आ रहे हैं कि गांव के बच्चे, जिनमें दलित और पिछड़े समाज के बच्चे भी शामिल हैं, मिलजुलकर खेलते और रहते हैं। उन्होंने दिल्ली में कुछ बुद्धिजीवियों से भी इन नियमों को समझने की कोशिश की और उनका मानना है कि ये नियम पक्षपाती और एकतरफा हैं।
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि नियमों में एक समाज को शोषित और दूसरे को पीड़ित मान लिया गया है, जबकि इस निर्णय में शोषित समाज का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं था। उनका कहना है कि यह समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि नियम लाने की मंशा स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके कारण सामाजिक तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने ओबीसी और दलित समाज के बच्चों से अपील की कि वे भी आगे आएं और अपनी स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल सवर्ण समाज की नहीं, बल्कि पूरे समाज की समस्या है।
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