हिमाचल में भारी बारिश का कहर, भूस्खलन से कई सड़कें बंद; गाय की मौत

HIGHLIGHTS
- नलवाड़ गांव में पत्थर गिरने से एक बछड़ी घायल हुई।
- पत्थर की चपेट में आने से टोका मशीन और उसकी मोटर भी टूट गई।
- नलवाड़ में चार-पांच परिवारों पर पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है।
शिमला। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भूस्खलन के कारण कई सड़कें बाधित हैं। बिलासपुर में पहाड़ी से गिरी चट्टान की चपेट में आने से गोशाला में बंधी एक गाय की मौत हो गई। भारी बारिश से नेशनल हाईवे 305 को भी काफी नुकसान पहुंचा है। नाहन-ददाहू सड़क पर नेहली के पास भूस्खलन हुआ है। वहीं, पिछले 24 घंटों के दौरान नयना देवी में 186.6, मलरांव में 140.0, कसौली में 102.0, घाघस में 99.0, नगरोटा सूरियां में 98.2, ब्राह्मणी में 90.4, स्लापड़ में 81.2, काहू में 77.6, शिमला में 42.8, धर्मशाला में 32.2, नाहन में 58.8, कांगड़ा में 69.0, बिलासपुर में 64.0, सराहन में 28.7 और नेरी में 39.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
नलवाड़ में पहाड़ी से गिरा भारी भरकम पत्थर, गाय की मौत
बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायत जुखाला के नलवाड़ गांव में देर रात पहाड़ी से भारी भरकम पत्थर गिरने से एक गाय की मौत हो गई, जबकि एक बछड़ी घायल हो गई। पत्थर की चपेट में आने से टोका मशीन और उसकी मोटर भी क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है।
ग्राम पंचायत जुखाला की उपप्रधान रूपा शर्मा ने बताया कि मंगलवार रात हुई भारी बारिश के दौरान रात करीब 11:30 से 12:00 बजे के बीच नलवाड़ गांव में बड़ी पहाड़ी से अचानक भारी पत्थर नीचे आ गिरा। नीचे आते समय पत्थर दो-तीन पेड़ों से टकराया, जिससे उसकी रफ्तार कुछ कम हुई। इसके बावजूद पत्थर ने वहां लगी टोका मशीन को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और उसकी मोटर भी टूट गई। पत्थर की चपेट में आने से मौके पर बंधी गाय की दबकर मौत हो गई। वहीं, दूसरे पशुओं की टांगों में चोट आई है।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के परिवार मौके पर पहुंचे और पशुओं को सुरक्षित निकालने में जुट गए। पशुशाला में करीब 8-10 भैंसें भी मौजूद थीं। ग्रामीणों ने उन्हें किसी तरह बाहर निकालकर दूसरे परिवार की जगह पर बांधा। उन्होंने बताया कि फिलहाल पशुओं के लिए वहां तिरपाल समेत अन्य जरूरी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में प्रशासन से प्रभावित परिवारों को तुरंत तिरपाल और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
रूपा शर्मा ने कहा कि पहाड़ी से अभी और पत्थर गिरने की आशंका बनी हुई है। नलवाड़ में पहाड़ी के नीचे रह रहे चार-पांच परिवारों को खतरा है। बारिश बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने डीसी और प्रशासन से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और परिवारों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
भूस्खलन से नेशनल हाईवे 305 कई जगहों पर बंद
मंगलवार रात हुई भारी बारिश से नेशनल हाईवे 305 को काफी नुकसान पहुंचा है। कई जगह भूस्खलन और हाईवे के क्षतिग्रस्त होने के कारण यातायात ठप है। इससे आनी विधानसभा का जिला मुख्यालय कुल्लू से सीधा संपर्क कट गया है।
हाईवे को कंडूगाड़ और कमांद के पास काफी क्षति पहुंची है। इसके अलावा खनाग में भी कई जगह हाईवे अवरुद्ध है। हाईवे पर कई वाहन फंसे हुए हैं। प्रशासन सड़क बहाली के काम में जुटा है। हालांकि, हाईवे को बहाल करने में अभी लंबा समय लग सकता है।
भूस्खलन से नेहली के पास नाहन-ददाहू मार्ग बाधित
भारी बारिश के कारण नाहन-ददाहू सड़क नेहली के पास भूस्खलन होने से बंद हो गई। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा आने से दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। इससे नाहन और ददाहू के बीच आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
उपमंडल अधिकारी नाहन राजीव संख्यान ने बताया कि सड़क से मलबा हटाने का काम जारी है और मार्ग के शाम तक बहाल होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि नाहन से ददाहू की ओर जाने वाले लोग जमटा-बिरला मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा शिलनू-कैलाश मार्ग से होकर भी ददाहू पहुंचा जा सकता है।
इन जिलों में दो दिन भारी बारिश का येलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में 2 और 3 सितंबर को भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 4 से 6 सितंबर तक कुछ भागों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं, 7 और 8 सितंबर को एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश के आसार हैं।
आज कांगड़ा, सिरमौर और मंडी जिले के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट है। वहीं, 3 सितंबर को कांगड़ा और सिरमौर जिले के लिए अलर्ट जारी किया गया है।
मानसून सीजन में अब तक 259 लोगों की गई जान
इस मानसून सीजन में 30 जून से 1 सितंबर तक प्रदेश में आपदा की वजह से 259 लोगों की जान जा चुकी है। 468 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 153 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई है।
इसके अलावा इस अवधि के दौरान 34 पक्के और 71 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं, 451 कच्चे-पक्के मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 17 दुकानों और 397 गोशालाओं को भी नुकसान हुआ है। प्रदेश में इस मानसून में नुकसान का आंकड़ा 1,20,264.27 लाख रुपये पहुंच गया है।
सितंबर में ऐसा रहेगा मौसम
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार सितंबर के दौरान चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। वहीं, राज्य के बाकी हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है। हालांकि, बिलासपुर जिले के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य रहने की संभावना है।
सितंबर के दौरान देश के ऊंचे और उनसे सटे मध्यम पहाड़ी इलाकों में औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की बहुत संभावना है। जबकि निचले और मध्यम पहाड़ी इलाकों में इसके सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना है। सितंबर में कई हिस्सों में औसत अधिकतम तापमान के सामान्य से अधिक रहने की भी बहुत संभावना है।
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